छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक नवजात बच्चे और उसकी मां को बंधक बनाने का मामला सामने आया है। एक निजी हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद प्रसूता, नवजात बच्चे और उसके तीन साल के बेटे को पैसे जमा नहीं जमा होने के कारण अस्पताल प्रबंधन ने बंधक बना लिया।

जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार जनजाति समुदाय से आता है।

15 हजार के लिए बनाया बंधक
प्रसूता के परिजनों के अनुसार, डिलीवरी के बाद 15 हजार नहीं चुकाने पर तीनों को प्रबंधन ने 6 दिन तक बंधक बनाकर रखा। दरअसल, जिले के मैनपुर की रहने वाली नवीना चींदा को 18 जनवरी को लेबर पेन हुआ जिसके बाद उसे परिजन एक निजी अस्पताल में लेकर पहुंचे। वहां नॉर्मल डिलीवरी होने पर अस्पताल प्रबंधन ने 20 हजार रुपये का बिल बनाया।
परिवार के पास सिर्फ थे 5 हजार रुपये
परिवार के पास चुकाने के लिए सिर्फ 5 हजार ही थी। प्रसूता की सास ने कहा कि वह बाद में 15 हजार रुपये चुका देगी लेकिन अस्पताल प्रबंधन नहीं माना जिसके बाद पीड़िता की सास पैसों के इंतजाम के लिए गांव गई लेकिन पैसों का इंतजाम नहीं हो सका। इसके बाद पीड़िता की सास ने गांव के कुछ युवाओं को पूरी जानकारी दी। जिसके बाद युवाओं ने मीडिया और पुलिस को जानकारी दी।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने दिया दखल
प्रसूता की सास दोषो बाई ने बताया कि पैसे का इंतजाम करने के लिए वह 21 जनवरी को गांव लौट आईं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा पोड़ा आंध्र प्रदेश में ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता है और वह भी पैसे का इंतजाम नहीं कर पा रहा था। वहीं, जब मामले की जानकारी जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप को हुई तो उन्होंने लोगों को भेजा और महिला की छुट्टी कराई।
अस्पताल के खिलाफ होगी कार्रवाई
वहीं, इस पूरे मामले की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने निर्देश दिए हैं। पीड़ित परिवार ने कहा कि उन्हें सरकार की तरफ से मिलने वाली योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल रहा है।
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