अरुण मालकार हैँ सबसे बड़े कलाकार: आज है सारंगढ़ राजनीति के चाणक्य का जन्मदिन, पढ़िए कैसे बने समाज सेवी से कांग्रेस के अजेय योद्धा, और कौन है उनके राजनितिक गुरु…
जगन्नाथ बैरागी..
रायगढ़। 6 जून 1973 को सारंगढ़ के साधारण किसान परिवार मे श्री पदुम लाल और मा बसंती की गोद मे चौथे बेटे का जन्म हुवा, माता पिता ने बेटे का रखा अरुण। 4 भाइयों मे सबसे छोटे होने के कारण माता पिता के साथ अरुण सबके लाडले थे। माता से धार्मिक संस्कार और पिता से समाज सेवा का भाव ,बड़े भाइयों से अन्याय के खिलाफ मुखर होना अरुण ने परिवार मे ही सीखा, बचपन से अरुण की नियत भी निर्भीकता साफ झलकती थी। गरीबों की सेवा हेतु छोटे उम्र से ही तत्पर रहने वाले अरुण के बारे मे पिता को बालपन से अंदेशा हो गया था की उनके घर मे भविष्य का बड़ा नेता पल रहा है।

शिक्षा एवं राजनितिक जीवन परिचय:
नगरपालिका (म्यूनिसिपल) मे प्राथमिक से लेकर 10 वीं तक शिक्षा प्राप्त करने के दौरान ही छुवा-छूत और जात-पात से दूर रहकर सबके साथ प्रेम भाव से रह कर शाला सफाई मे अग्र रहने वाले अरुण ने 11 वीं एवं 12 वीं की पढ़ाई सारंगढ़ के मल्टीपरपज मे की। कुशाग्र बुद्धि के धनी अरुण मालाकार को उच्चशिक्षा के लिए आईटीआई हेतु उज्जैन भेजा गया जहाँ जहाँ से उन्होने छात्र नेता के रूप मे राजनितिक जीवन की शुरुवात आईटीआई अध्यक्ष के रूप मे की। सारंगढ़ के छोटे शहर से उज्जैन के बड़े शहरों के छात्रों के मध्य अध्यक्ष बनना और पद का सफल निर्वहन करना अरुण को अरुण मालाकार बनाने की पहली सीढी थी। समाज सेवा मे विशेष रुचि रखने के कारण उन्होंने कॉलेज मे भी समाजशास्त्र लेकर पढना उचित समझा जिससे वो समाज की बारीकियों से और भली-भांति अवगत हो सकें। 1993-94 मे सारंगढ़ कॉलेज मे भी अरुण मालाकार अध्यक्ष रहकर युवाओं को अपने साथ जोड़ा और छात्र हित मे अनेको कार्य किये। 1996 से 1998 तक जन संघर्ष समिति के पुनः अध्यक्ष बने। सन 2000 मे ग्राम सहसपुर मे सरपंच पड़ पर खड़े होकर विजेता बने,तथा उसी वर्ष अपने नेतृत्व क्षमता के कारण सरपंच संघ अध्यक्ष भी मनोनीत हुवे।
सन 2002 मे दाम्पत्य जीवन मे कदम रखने वाले अरुण मालाकर जी के वर्तमान मे 2 पुत्र हैँ। सरपंच संघ अध्यक्ष के बाद उनकी पहचान सारंगढ़ अंचल के एक उम्दा राजनेता के तौर पर हो चुकी थी, लेकिन अरुण इतने मे खुश होने वाले नही थे उन्होंने सन 2005 मे दानसरा क्षेत्र से बीडीसी चुनाव लड़ा जिसमे भी उन्होंने जीत हाशिल की,सन 2010 मे जनपद उपाध्यक्ष मनोनीत हुवे, 2015 मे पुनः जनपद उपाध्यक्ष,2020 मे सभापति एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद पर शुशोभित हुवे और आज सारंगढ़ कांग्रेस के गेम मेकर और चाणक्य तथा राजनीति के असली कलाकार कहे जाते हैँ।

स्व. नंद कुमार पटेल हैँ मेरे राजनितिक गुरु – अरुण मलाकार

अरुण मालाकार ने कहा की शहीद नंदकुमार पटेल संघर्ष का दूसरा नाम था। शहीद नंदकुमार पटेल हमेशा सक्रिय रहते हुए किसान, मजदूर, आदिवासी, महिला एवं युवाओं के उत्थान व विकास के लिए लगातार काम करते रहे। उनका छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर, किसानों, आदिवासी मजदूरों, महिलाओं व युवाओं सहित सभी वर्गाे के विकास के लिए जो संकल्प व सपना था उसको साकार करने के लिए है उनकी सरकार प्रयत्नशील हैँ, और वो मेरे राजनितिक गुरु भी हैँ।

लोगों के प्यार ने पहुंचाया लोकप्रियता के चरम पर – उत्तरी गणपत जांगड़े

अरुण मालाकार के जन्मदिन पर विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े ने रहस्य से पर्दा खोलते हुवे कहा की आज अरुण मालाकार जी की लोकप्रियता जनता की सेवाभाव, बिना राजनैतिक पार्टीगत भेदभाव के सभी जरूरतमंदो की मदद करते हैँ इसलिए उनके विरोधी भी खुले मन से उनकी प्रशंसा करते और,यही उनकी लोकप्रियता का रहस्य भी है। उनके साथ काम करना अपने आप मे गौरव का विषय है।


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