आज मातृ दिवस पर एक ऐसी कहानी याद आई जो दिल के काफी करीब लगती है ।बात कर रहा हूँ लाखों युवाओं के प्रेरणासत्रोत और छत्तीसगढ़ के पहले और सबसे कम उम्र के IAS श्री ओपी चौधरी जी की । ओपी जी की सफलता का पूरा श्रेय उनकी माँ कौशल्या जी को दें तो गलत नहीं होगा । कम उम्र में जब पिता का साया उनके सर से छूट गया तब आगे जाकर अनुकंपा की नौकरी उन्हें मिल सकती थी । जब ओपी जी अपनी मां के साथ कलेक्टर के दफ्तर पेंशन लेने जाया करते थे तब हमेशा देखते थे और सोचते थे कि कलेक्टर तो बहुत तोफ चीज है यार – कुछ भी आर्डर करो तो तुरंत हो जाता है। तब से ओपी चौधरी जी कलेक्टर बनने का सपना देखने लगे । उनके इस सपने को उनकी माँ बहुत अच्छे से समझती थी और यह जानती थी कि ओपी में कुछ कर गुजरने की बात जरूर है । इसलिए उनकी चौथी पढ़ी माँ ने अपने बेटे ओपी के लिये अनुकंपा की नौकरी चुनने की बजाय कठोर परिश्रम, विषम परिस्थिति, और कई प्रकार की चुनौतियों को चुना और आगे बढ़ने प्रेरित किया।और इस प्रकार कठिन परिस्थितियों से निकलकर बड़ी बड़ी चुनौतियों को पार कर ओपी चौधरी बने छत्तीसगढ़ के पहले IAS (आई. ए. एस.) ।कलेक्टर बनते ही शिक्षा के योजनाओं की लगातार झड़ी लगा दी ओपी जी ने जो इस समाज को ऊपर ले जाने के लिए किसी वरदान से कम नहीं।उनके इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें प्रधानमंत्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

मातृशक्ति को सलाम मातृ दिवस की बधाई
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