छत्तीसगढ़ का चमत्कारी तालाब: इस तालाब में स्नान करने से त्वचा संबंधी “चर्मरोग” रोग से मिलती है मुक्ति! भक्तों की लगती है भीड़….
नवरात्रि का आज सातवां दिन हैं और आज मां कालरात्रि की पूजा की जा रही है। देवी के तमाम मंदिरों के साथ ही रायपुर के कंकाली मंदिर में भी भक्तों की भीड़ नजर आई।
रायपुर का कंकाली मंदिर शहर के बीच में स्थित हैं। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां नवरात्रि के अवसर पर पंचमी से अष्टमी तक ही माता के अष्टभुजी स्वरूप के दर्शन होते हैं। चैत्र और क्वार नवरात्रि के अवसर पर माता के अष्टभुजी स्वरूप भक्तों को नजर आते हैं।
700 साल पहले नागा साधुओं ने की थी मठ स्थापना
बाकी दिन भक्त मंदिर आए तो उन्हे देवी के अष्टभुजी स्वरूप के दर्शन नहीं होते क्योंकि पंडित बताते हैं कि बाकी दिन मां के अष्टभुजी स्वरूप को नहीं दिखाया जाता और श्रृंगार से छिपा दिया जाता है। मंदिर के इतिहास को लेकर मंदिर के पुजारी बताते हैं कि करीब 700 साल पहले आजाद चौक, ब्राह्मणपारा के समीप नागा साधुओं ने मठ की स्थापना की थी। वे मां कंकाली के परम भक्त थे। महंत कृपाल गिरी महाराज को मां कंकाली ने स्वप्न में दर्शन देकर कुछ ही दूर मंदिर निर्माण करने की आज्ञा दी।
कंकाली तालाब में मिलती है मुक्ति
लगभग 650 साल पहले मंदिर का निर्माण पूरा हुआ और मां कंकाली की प्रतिमा को मठ से स्थानांतरित करके मंदिर में स्थापित किया गया। मंदिर के ठीक सामने एक बड़ा तालाब भी हैं जिसे कंकाली तालाब कहा जाता है। इस मंदिर में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोग से मुक्ति मिलती है साथ ही तालाब के बीचों बीच एक शिवलिंग भी हैं। भक्तों को शिवलिंग के दर्शन नहीं हो पाते।
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