सर्दियों में क्यों बढ़ता है वज़न? डॉक्टर ने बताया असली साइंटिफिक सच और शेयर किए कंट्रोल के असरदार तरीके…
मौसम शुरू होते ही वजन बढ़ने की शिकायत सुनने को मिलती है। कई लोग मानते हैं कि सर्दियों में खाने की मात्रा बढ़ जाने, कम शारीरिक गतिविधि और मोटे कपड़ों के कारण वजन बढ़ने लगता है लेकिन क्या यह सिर्फ एक मिथ है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी मौजूद है।
सर्दी का मौसम हमारे शरीर के लिए कुछ अलग चुनौतियों को सामने लाता है। तापमान गिरने की वजह से हमारा शरीर एनर्जी को बचाने के लिए मेटाबॉलिज्म में कुछ बदलाव करता है।
इसके साथ ही सर्दी के मौसम में दिन भी छोटे होने लगते हैं और सूरज की रोशनी कम मिलने की वजह से हार्मोनल बैलेंस और मूड पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और खाने की इच्छा बढ़ने लगती है।
डॉक्टर सुरेंद्र कुमार जनरल फीजिशियन, दिल्ली के मुताबिक, ठंड के दिनों में शरीर खुद को गर्म रखने के लिए ज्यादा कैलोरी की मांग करता है और हम अनजाने में अधिक खाना खाने लगते हैं। यही वजह है कि कई लोगों का वजन ठंड के महीने में बढ़ जाता है लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर हम इसके वैज्ञानिक कारण को समझें और अपने लाइफस्टाइल में कुछ स्मार्ट बदलाव करें तो सर्दियों में होने वाले वेट गेन को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
ठंड में शरीर का मेटाबॉलिज्म बदलता है
सर्दी में तापमान कम होने की वजह से शरीर अपने टेंपरेचर को बनाए रखने के लिए एक्स्ट्रा एनर्जी की डिमांड करता है। इस दौरान हमारा शरीर थर्मोजेनेसिस के जरिए गर्मी पैदा करता है, जिसमें कैलोरीज बर्न होती हैं। सुनने में यह वजन घटाने जैसा महसूस होता है लेकिन इसकी असलियत थोड़ी अलग है। जब बाहर ठंड होती है तो शरीर अपनी ऊर्जा को बचाने की कोशिश करता है और मेटाबॉलिज्म रेट थोड़ा धीमा हो जाता है। इसलिए हम ठंड के मौसम में इतनी तेजी से कैलोरीज बर्न नहीं कर पाते जितनी की गर्मी में।
सर्दी में भूख बढ़ जाती है
ठंड में अक्सर लोग ज्यादा भूख महसूस करते हैं। इसके पीछे यह साइंस है कि जैसे ही तापमान गिरता है। शरीर को अपने टेंपरेचर को संतुलित करने के लिए अधिक कैलोरी की जरूरत होती है। यही कारण है कि सर्दियों में हम बार-बार और ज्यादा मात्रा में खाना खाने लगते हैं। ऐसे में हमें गर्म सूप, दलिया, ओट्स और उबली हुई सब्जियों का सेवन करना चाहिए। मीठे की क्रेविंग हो तो फल खाना उचित रहेगा।
हार्मोनल बदलाव और कम धूप
सर्दी के मौसम में दिन छोटे होते हैं और धूप की कमी होने के कारण शरीर में विटामिन डी की कमी और मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है। मेलाटोनिन नींद और मूड से जुड़ा हुआ हार्मोन है। इसकी अधिकता होने से शरीर में सुस्ती महसूस होती है और सेरोटोनिन लेवल घट जाता है, जो एक हैप्पी हार्मोन है। सेरोटोनिन की कमी की वजह से कई लोगों में मीठा खाने की इच्छा बढ़ जाती है और बार-बार यह प्रक्रिया हो तो कैलोरी इनटेक बढ़ जाती है और वजन भी बढ़ने लगता है।
कम शारीरिक गतिविधि
सर्दियों में ठंडी हवा और दिन की अवधि कम होने के कारण अक्सर लोग घर में ही रहना पसंद करते हैं। सुबह उठकर वाकई जिम जाना काफी मुश्किल लगने लगता है। इससे हमारी शारीरिक गतिविधि में कमी आती है और शरीर गर्मी की अपेक्षा सर्दी के मौसम में काम कैलोरीज बर्न करता है। लंबे समय तक बैठकर टीवी देखना या लैपटॉप पर काम करते रहना एक अनियमित लाइफस्टाइल को बढ़ावा देता है जो वजन बढ़ाने के प्रमुख कारणों में से एक है।
सर्दियों में पानी कम पीना
ठंड के मौसम में हमें प्यास कम लगती है। इसलिए हम कम पानी पीते हैं लेकिन ऐसा करने से हमारे मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक असर होता है। डिहाइड्रेशन की वजह से हमारे शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता घटने लगती है और भूख बढ़ जाती है, क्योंकि कई बार हमारा शरीर प्यास को भूख समझ बैठता है। ऐसे में पानी की कमी से लीवर और किडनी का काम भी धीमा हो जाता है, जिससे टॉक्सिंस हमारे शरीर से आसानी से बाहर नहीं निकल पाते और फैट स्टोरिंग बढ़ जाती है।
त्योहार और सोशल ईटिंग कल्चर
भारत में अक्सर सर्दी के मौसम में कई त्यौहार, शादी विवाह या पारिवारिक आयोजनों का भी समय होता है। ऐसे मौके पर आमतौर पर स्वादिष्ट और तली भुनी चीज खाई जाती हैं और कैलोरी इनटेक बढ़ने लगता है। ऐसे में अक्सर लोग सामाजिक माहौल में जरूर से ज्यादा खाना खा लेते हैं क्योंकि उसे समय हम सचेत होकर नहीं खाते। धीरे-धीरे यही आदत सर्दियों में वजन बढ़ाने की एक बड़ी वजह बन जाती है। इसलिए किसी भी पार्टी में जाने से पहले हल्का हेल्दी स्नैक खाएं और मीठे और ताली चीजों की मात्रा नियंत्रित रखें।
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