छत्तीसगढ़ के बिल्हा ब्लॉक में दो अलग-अलग प्राथमिक शालाओं के शिक्षकों पर पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगने के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया है।

इन मामलों में विभागीय जांच में दोनों शिक्षक दोषी पाए गए हैं, बावजूद इसके थाना पुलिस ने स्पष्ट तौर पर कह दिया कि एफआईआर तभी दर्ज होगी जब पीड़िता या उनके परिजन थाने पहुंचकर शिकायत करें।
बिल्हा ब्लॉक की शासकीय प्राथमिक शाला आवास पारा मंगला (पासीद) में पदस्थ हेड मास्टर रामकिशोर निर्मलकर पर छात्राओं ने छेड़खानी और अनुचित तरीके से छूने (बेड टच) का आरोप लगाया। जांच में आरोप सही पाए गए और डीईओ ने शिक्षक को सस्पेंड कर दिया।
रतनपुर थाना क्षेत्र की गोंदझ्या शाला में पदस्थ शिक्षक कमलेश साहू पर भी छात्राओं ने अनैतिक व अश्लील हरकत करने की शिकायत की थी। कलेक्टर अवनीश शरण के निर्देश पर गठित जांच समिति की रिपोर्ट में आरोप प्रमाणित पाए गए, जिसके बाद शिक्षक को बर्खास्त कर दिया गया।
दोनों मामलों की विभागीय जांच बीईओ सुनीता ध्रुव ने की और आरोप सही पाए जाने पर बिल्हा और रतनपुर थानों में एफआईआर दर्ज कराने आवेदन दिया, लेकिन पुलिस ने इसे अस्वीकार कर दिया। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल पीड़िता या उसके परिजन ही एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अनिल तिवारी ने स्पष्ट किया कि यदि विभागीय जांच में कोई कर्मचारी पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी पाया जाता है, तो विभाग को एफआईआर कराने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए पीड़िता या परिजन की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी को तखतपुर ब्लॉक की प्राथमिक शाला खुडियाडीह में शिक्षक अशोक कुर्रे के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में बीईओ ने स्वयं थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराई थी। उस समय पुलिस ने न तो पीड़िता को बुलाया और न ही परिजनों की उपस्थिति की मांग की।
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