सारंगढ़। कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष अरुण मालाकार ने प्रदेश में सामने आ रही अफीम की खेती के मामलों को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को लंबे समय से “धान का कटोरा” कहा जाता रहा है, लेकिन वर्तमान हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि प्रदेश की पहचान बदलने की स्थिति पैदा हो रही है।
अरुण मालाकार ने बताया कि दुर्ग जिले के समौदा गांव और बलरामपुर जिले के त्रिपुरी सहित कई अन्य स्थानों पर कई एकड़ जमीन में अफीम की खेती मिलने की घटनाएं सामने आई हैं। उनका आरोप है कि जिन खेतों में अफीम की खेती पाई गई, वे भाजपा से जुड़े लोगों के बताए जा रहे हैं, जिससे पूरे मामले पर और भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एक स्थान की गिरदावरी रिपोर्ट में पटवारी द्वारा खेत में लगी फसल को अन्य सामान्य फसल या अनाज बताया गया है, जबकि वास्तविकता में वहां अफीम की खेती लहलहाती हुई मिली। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए मालाकार ने कहा कि जब सरकारी रिकॉर्ड में ही सही जानकारी दर्ज नहीं होगी, तो ऐसे अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल हो जाएगा।
मालाकार ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान धान के उत्पादन और किसानों की मेहनत से रही है, लेकिन यदि ऐसे मामले लगातार सामने आते रहे तो प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस प्रदेश को नशे का अड्डा नहीं बनने देगी और इस तरह के मामलों को लेकर आवाज उठाती रहेगी।

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