सारंगढ़। जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडे ने कहा कि संत कर्मा माता केवल भक्ति की प्रतीक नहीं थीं, बल्कि वे सामाजिक चेतना, स्वाभिमान और अधिकारों की आवाज भी थीं। उन्होंने बताया कि कर्मा माता मूलतः एक संत होने के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाने वाली प्रेरणादायी व्यक्तित्व की धनी थीं, जिनका जीवन सामाजिक समानता और स्वाभिमान के संदेश से जुड़ा हुआ था।
उन्होंने कहा कि उस समय भारतीय समाज में जाति और लिंग के आधार पर अनेक असमानताएँ मौजूद थीं। ऐसे दौर में किसी महिला द्वारा समाज को संगठित करना और अधिकारों के लिए आवाज उठाना अपने-आप में एक क्रांतिकारी कदम था। बावजूद इसके इतिहास में उन्हें अधिकतर भगवान श्रीकृष्ण की भक्त के रूप में ही प्रचारित किया गया, जबकि उनके सामाजिक योगदान, संगठन क्षमता और समाज सुधार के प्रयासों पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो पाई।
संजय भूषण पांडे ने कहा कि संत कर्मा माता का एक महत्वपूर्ण पक्ष महिला जागरण से भी जुड़ा हुआ है। उस समय जब महिलाओं की सामाजिक भागीदारी सीमित थी, तब किसी महिला का समाज में नेतृत्व करना अत्यंत महत्वपूर्ण घटना मानी जाती थी। माना जाता है कि उन्होंने महिलाओं को सामाजिक चेतना, स्वाभिमान और समाज में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि संत कर्मा माता का जीवन महिला मुक्ति और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरणा है। वे केवल भक्ति की प्रतिमूर्ति नहीं थीं, बल्कि सामाजिक चेतना, समानता और महिला सशक्तिकरण की सशक्त प्रतीक के रूप में भी याद की जाती हैं।

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