छत्तीसगढ़: मतांतरित महिला के शव को मौत के बाद गांव में नहीं मिली दो गज जमीन, दस किमी दूर दफनाया… मतांतरितों को मूलधर्म में वापसी के लिए एक सप्ताह की अवधि…..

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संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से 10 किमी दूर स्थित जाटम पंचायत के बाहरी सीमा पर स्थित कब्रिस्तान में अधूरा खुदा हुआ कब्र दिखाई देता है, जिसे पिछले पांच दिन से कफन-दफन के बाद मिट्टी डालकर पाट दिए जाने का इंतजार है, पर अब इसमें मिट्टी डालने कोई नहीं आने वाला।
क्योंकि गांव की जिस मतांतरित महिला रामबती कश्यप के शव को दफनाने के लिए इसे खोदा गया था, उसे गांव में दफन के लिए दो गज जमीन नहीं मिली और जगदलपुर के कब्रिस्तान में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। भले ही रामबती की कब्र पर मिट्टी डालने कोई नहीं गया, पर इस गांव में मतांतरितों और आदिवासियों के बीच चल रहा मतांतरण विवाद इतना बढ़ चुका है कि गांव की ‘एकता’ की कब्र बनाकर इसमें मिट्टी डालने का काम ग्रामीण पहले ही कर चुके हैं।

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मतांतरितों को मूलधर्म में वापसी के लिए एक सप्ताह की अवधि

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बुधवार को हुए विवाद के बाद रविवार की सुबह ग्राम सभा में मतांतिरतों को मूलधर्म में लौटने को कहा है। मतांतरितों ने इसके लिए एक सप्ताह का समय ग्राम सभा से मांगा है। जाटम पंचायत के ग्राम सभा के अध्यक्ष सदाराम कश्यप कहते हैं कि विगत 28 मई को मतांतरित रामधर की मौत के बाद गांव में विवाद भड़क गया। लगातार गांव की शांति और सौहार्द को चोट पहुंचने के बाद जून माह में आदिवासियों का अवैध मतांतरण रोकने गांव में ग्राम सभा ने कड़े निर्णय पारित किए हैं।

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गांव की संस्कृति और परंपरा बनी रहे, इसलिए मतांतरितों के गांव के जलस्त्रोत, जंगल, जमीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने सहित उनके खेतों में गैर मतांतरितों के काम करने को भी प्रतिबंधित किया है। एक सप्ताह में यदि मतांतरित मूलधर्म में नहीं लौटते तो अगले रविवार से इन नियमों को लागू किए जाने का निर्णय ग्राम सभा ने लिया है।

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गांव के सरपंच हरिराम मंडावी कहते हैं, गांव के मतांतरित अब ग्राम देवी-देवता की पूजा नहीं करते और देवगुड़ी में नहीं जाते। गांव के तीज-त्योहार में भी चंदा नहीं देते। इससे गांव में विसंगति उत्पन्न हो रही है। एक ही परिवार में भाई-भाई अलग-अलग देवी-देवता की पूजा कर रहे हैं। इससे आदिवासियों की संस्कृति और रीति-रिवाज पर खतरा मंडरा रहा है।

गांव की शांति और सौहार्द बनाए रखने अवैध मतांतरण पर लगाई रोक

ग्राम सभा की बैठक के बाद रविवार की दाेपहर डोगाम स्थित चर्च में मतांतरितों की भी बैठक हुई, इसमें शहर से पास्टर भी पहुंचे थे। पास्टर अमन महानंद व मतांतरित सिरनाथ नाग ने बताया कि मतांतरित मूलधर्म में वापस नहीं लौटेंगे। पास्टर अमन कहते हैं कि यदि गांव वाले मतांतरितों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी लेते हैं तभी वे घर वापसी करेंगे।

गांव की मतांतरित महिला दशरी कश्यप ने बताया कि उसकी बेटी मुन्नी की बीमारी के बाद परिवार ने बीमारी से ठीक होने के लिए मतांतरण किया था। गांव के रामेश्वर की पत्नी धनमती को बीमारी थी, इसलिए एक वर्ष पहले वह भी मतांतरित हुआ था। बस्तर के सैकड़ों गांव में इस तरह के विवाद अब हर दूसरे दिन सामने आ रहे हैं।

कुछ माह पहले नारायणपुर के एड़का से शुरु हुए विवाद ने दंगे का रूप ले लिया था, जिसमें एसपी सदानंद कुमार का सिर फुट गया था। भेजरीपदर, फरसागुड़ा, मालगांव, अलवा, तारागांव, रानसरगीपाल, सहित दर्जनों गांव में पिछले कुछ माह में इसी तरह से विवाद की घटनाएं हुई है। ऐसा प्रतीत हो रहा है, मतांतरण ने बस्तर को वर्ग संघर्ष की आग में झोंक दिया है।

जाटम में दो वर्ष में छठवीं बार विवाद

शहर सीमा से सटे जाटम व आश्रित गांव डोगाम में 350 परिवार रहते हैं, इसमें 25 परिवार मतांतरित हो चुके हैं। गांव में तीन चर्च भी बने हुए हैं। पिछले दो वर्ष में इस गांव में मतांतरितों व आदिवासियों के बीच छह बार विवाद हुआ है, जिसमें पुलिस व प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा है। इसमें शव दफनाने के पांच विवाद है। गांव के मतांतरित पाकलू कश्यप की मौत से शव दफनाने को लेकर शुरू हुए विवाद ने अब तक मंगतीन, अंजना, रामधर के बाद रामबती तक गांव की शांति को भंग करने का काम किया है। गांव में दो वर्ष पहले मतांतरितों को कब्रिस्तान के लिए जमीन देने पर भी विवाद हो चुका है।

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