वक्ता मंच की काव्य गोष्ठी: चेतन भारती महामूर्ख बने…”ये साल भी एक सवाल रह गया तेरे नाम का गुलाल रह गया”: राहुल साहू
रायपुर l अग्रणी साहित्यिक संस्था वक्ता मंच द्वारा आज होली के अवसर पर पेंशनर्स समाज भवन रायपुर में काव्य गोष्ठी संपन्न हुई l ‘होली की हुड़दंग – कवियों के संग ‘ शीर्षक से संपन्न इस कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ साहित्यकार चेतन भारती को महामूर्ख का ताज पहनाया गया l कवियों ने इस अवसर पर फूलों की होली खेली एवं प्रदेशवासियों से प्रेम व सौहार्द्र से इस पर्व को मनाने का अनुरोध किया l कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार चेतन भारती थे l अध्यक्षता राष्ट्रीय स्तर के मंचीय कवि कुमार जगदली ने की l सिंधी भाषा के वरिष्ठ कवि राजकुमार मसंद एवं कर्मचारी नेत्री ज्योति शुक्ला विशिष्ट अतिथि थी l काव्य गोष्ठी का प्रभावी संचालन संस्था के अध्यक्ष राजेश पराते एवं संयोजन शुभम साहू द्वारा किया गया l कार्यक्रम के दौरान कल्याणी तिवारी ‘कोकि’ के काव्य संग्रह ‘ मन के मनके ‘ का लोकार्पण किया गया l जाने माने कवि राकेश अग्रवाल एवं युवा सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत यदु के जन्मदिन को उत्सवित भी किया गया lप्रमुख प्रस्तुतियां इस प्रकार रही:-
राहुल साहू
ये साल भी एक सवाल रह गया ,
तुमसे मिलने का मलाल रह गया l
होली के सारे रंग रखे है हाथ में ,
बस तेरे नाम का गुलाल रह गया l
कुमार जगदली:-
वृन्दावन नटवर छाए…होरी में
वृन्दावन नटवर छाए
रंग ग़ुलाल उड़ाए राधिका
ग्वाले झांज बजाए
ग्वाले झांज बजाए होरी में
वृन्दावन नटवर छाए
वृन्दावन नटवर छाए जोगीरा ….
एस एन जोशी:-
इल्जाम ऐ सौ गुनाह अपने सर लिए हुए,
हम सब खड़े है हाथों में पत्थर लिए हुए l
जंग सब खत्म हुई अमन हुआ बहाल,
कब आयेगा अखबार ये खबर लिए l
रश्मि शकुंतला मिश्रा:-
प्रीत लगी होली यह खेले राधा कृष्ण संग,
ग्वाल बाल मुग्ध सारे
रंगे ही रहते है l
नीला पीला हरा लाल
भरा है गुलाल नभ,
फाग गूंजे चहूं ओर
हंसते ही रहते है l
पूजा अग्रवाल:-
धरती गगन में कैसे उड़े है गुलाल,
रुत मस्तानी देख हुए नैन ये निहाल l
राकेश अग्रवाल:-
ट्रंप चाचा को नोबल दे दो वरना होंगे क्रुद्ध,
चचा हो गए क्रुद्ध तो नहीं रुकेगा युद्ध l
सुषमा प्रेम पटेल:-
आया फागुन बृज महकाया बजे मुरलिया तान,
रंग बसंती रास रचाए छेड़े श्याम सुजान l
मुकेश सिंग राठौर:-
रग रग रंग रहा,आज सब रंग ही में
रंगते सबको देखो, आज आई होली रे l
कान्हा संग राधा आई, साथ लिए रंग लाल
रंगने को श्याम आज,
गोप आई होली रे l
काव्य गोष्ठी में राजेश पराते, शुभम साहू, चेतन भारती, कुमार जगदली, राजकुमार मसंद, ज्योति शुक्ला, राजाराम रसिक, कमल सूर्यवंशी, गंगा शरण पासी, अर्चना श्रीवास्तव, रामचंद्र श्रीवास्तव, प्रशांत यदु, डॉ इंद्रदेव यदु, डॉ उदयभान सिंह चौहान, मन्नू लाल यदु, सुषमा पटेल, सुनीता वैष्णव, कल्याणी तिवारी, विवेक बेहरा, रश्मि शकुंतला मिश्रा, राकेश अग्रवाल, मुकेश सिंह राठौर, डॉ सरोज साव, सत्येंद्र तिवारी, एस एन जोशी, लवकुश तिवारी, संजय देवांगन, विवेक कुमार, पुष्पांजलि साहू, मो. हुसैन, तामेश्वर साहू, दीपमाला पाण्डेय, पूजा अग्रवाल, यशवंत यदु, रिक्की बिंदास, राहुल साहू, द्वारिका श्रीवास, सतीश कुमार सोनी एवं सीमा पांडेय सहित 40 कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां दी l अंत में फूलों की होली खेलने के साथ आयोजन समाप्त हुआ l
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