रायगढ़: जिले के लैलूंगा और राजपुर में वर्ष 21 22 में हुई फर्जी रकबा वृद्धि कर की गई। बोगस धान खरीदी व वित्तीय अनियमितता पर सहकारिता विभाग ने चुप्पी साध ली है।
किसानों के नाम पर फर्जी रकबा बढ़ाकर धान खरीदी की गई। लैलूंगा और राजपुर के प्रबंधकों समेत कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जब फर्जी रकबा वृद्धि प्रमाणित हो गया तो बोगस खरीदी और उठाव भी हुआ है जिस पर कार्रवाई नहीं की गई और न ही फर्जी रकबे पर धान बेचकर समर्थन मूल्य और बोनस की किस्त पाने वालों से रिकवरी की गई। धान बेचने के लिए फर्जी रकबा वृद्धि कर लाखों का चूना शासन को लगाया गया। लैलूंगा, राजपुर और बीरसिंघा में यह कांड हुआ था।
तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर भी दर्ज कर ली गई। पुलिस ने कुछ मंडी कर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। प्रबंधकों को दोषी पाए जाने के बाद भी पुलिस की जांच में लेटलतीफी व कार्रवाई में विलंब का लाभ मिला। अब जमानत मिलने की खबर है। लेकिन असली मामला फर्जी रकबे पर रिकवरी का है। शासन को जो नुकसान हुआ उसकी वसूली का अता पता ही नही है।
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