रायगढ़: अनाथालय, मुखबधीर, भंडारा के नाम से गाँव गाँव जाकर मांगा जा रहा है चंदा..प्रदेश से बाहर के लोगों की भागीदारी अधिक, धर्म के नाम पर लुटा रहे हैं सारंगढ़ – रायगढ़ के धर्म परायण भोले भाले जनता! अनहोनी घटना की आशंका, कारगर कदम उठाने की जरूरत….
रायगढ़। प्रदेश से बाहर के लोगों की इसमें भागीदारी अधिक, लुटा रहे हैं छ.ग. के धर्म परायण भोले भाले जनता, अनहोनी घटना की आशंका, कारगर कदम उठाने की जरूरत। पुसौर थाना क्षेत्र में ही नहीं बल्कि जिले व प्रदेश के अलग अलग क्षेत्र में छ.ग. से बाहर के कुछ ऐसे लोग मिलते हैं जो भोले भाले ग्रामीण जनता से अनाथालय चलाने के नाम पर चंदा लेते हैं, कुछ तो प्रसिद्ध तीर्थस्थलों का नाम बताकर वहां हवन करने के नाम पर आर्थिक सहयोग लेते हैं और कुछ तो मुक बधिर बनकर ऐसे पाखंड दिखाते है जिसमें कि लोग चंदा देने के लिये मजबूर हो जायें। ऐसे ही एक मामला बिते दिनांक को पुटकापुरी के अटल व्यवसायिक परिसर में एक महिला अनाथालय चलाने के नाम पर गांव गांव जाकर चंदा लेने कौ बात चंदा मांग रही थी वह एक नये बाईक में कही। इसने अपना नाम तुलसी बाईं पति एक लडके के साथ बैठकर आई थी जो पदम साकिन अरिना कला इंदौर मध्यप्रदेश बताया इसके साथ उसी साकिन का एक लडका बादलनाथ पिता पप्पुनाथ था। इनके आधार कार्ड के साथ उनका यह पता मिलान भी हो रहा था। इन्होने बताया कि सुलोचना ठाकरे जन सेवा समिति गाजीपुरा, तहसील धरमपुरी जिला धार, हेड आपफ्सि इंदौर के लिये हम चंदा मांगने आये है चूंकि इस संस्था द्वारा अनाथालय चलाया जाता है। इन्होने मोबाईल नं. 9009950223 में बात कर पुष्टी करने को भी कहा, बात भी की गई तो पता चला कि ये उनके लिये काम करते हैं। चंदा मांगने वाली उक्त तुलसी बाई ने बताई कि मैं प्रतिवर्ष आती हूं ।
जिसमें मुझे चावल पैसा जो भी मिलता हैं में लेकर जाती हूं। अब यहां सवाल यह है कि तुलसी बाई जिससे बात कराई वह क्या वहां वास्तव में अनाथालय चला रहा है? क्या वसूली की गई चंदा विधिवत वहां जमा देती है या नहीं ये सारे तथ्य एक रहस्य के रूप में है जिसका तस्दीक करने वाला कोई नहीं पर दान देने वाले जरूर है जिसका बेजा फयदा ऐसे लोग उठा रहे हैं। ज्ञात हो कि रायगढ में वृद्धाश्रम और अनाथालय कई दशकों से है जहां के प्रबंधन से जुडे लोग प्रदेश से बाहर क्या पुसौर क्षेत्र में कभी चंदा लेने नहीं आये है और सैकडों किलोमीटर दूर अलग प्रदेश से वहां के अनाथालय के लिये चंदा लेने आना गले से नहीं उतर रहा है ऐसे स्थिति में इसमें अंशदान करने वाले पुसौर, बरमकेला, सारंगढ़ क्षेत्र के लोगों और प्रशानिक अमला को पैनी नजर रखने की जरूरत है।
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