जगन्नाथ बैरागी

रायगढ़ । रायगढ़ ज़िले के जामबहार ग्राम पंचायत के सरपंच सत्यनारायण भगत ने धर्मांतरण कर चुके एक परिवार के जाति प्रमाण पत्र के आवेदन को सही प्रारुप में भरने की बात कहकर वापस कर दिया। जाति प्रमाण पत्र के मामले पर यह मसला रहा है कि, धर्मांतरण के बाद आदिवासी अपने पुराने परंपरागत तरीक़े पर नहीं होते, उनके देव और पूजा के तरीक़े बदलते हैं, लेकिन फ़ॉर्म में उनसे यह तथ्य नहीं लिखवाया जाता, बल्कि वे कॉलम में आदिवासी समाज की परंपराओं के अनुरूप ही भरते हैं।जिससे धर्मांतरण करने के बाद भी उन्हें आदिवासी होने का लाभ मिलता है।
रायगढ़ के जामबाहर के धर्मांतरित आदिवासी परिवार ने ऐसा ही फ़ॉर्म भरकर दिया तो सरपंच सत्यनारायण भगत ने फ़ॉर्म में सही तथ्य भरने की बात कहते हुए फ़ॉर्म वापस कर दिया।
सत्यनारायण भगत ने बताया
“जाति प्रमाण पत्र के आवेदन के प्रारुप में एक कॉलम में उन्होंने देवता के रुप में शिव पार्वती लिखा था, जबकि वे धर्मांतरित है और ईसाई है,उन्होंने खुद स्वीकारा कि अब ईसा की पूजा करते हैं तो मैंने उन्हें सही लिखकर फार्म फिर से जमा करने कहा है..फिर उन्हें जाति प्रमाण पत्र मिले ना मिले ये मैं नहीं जानता.. मेरा आग्रह बस फ़ॉर्म सही भरने को लेकर है जिसे वह परिवार मान गया है”
अब अगर आप यह सोच रहे हैं कि फ़ॉर्म पर सही तथ्य लिखने की सामान्य प्रक्रिया मसला क्यों बन गया तो इस क्यों का जवाब इस बात में मिलेगा कि सही तथ्य लिखने के आग्रह ने तूफ़ान मचा दिया है। इस तूफ़ान में मिशन और धर्मांतरण विरोधी दोनों ख़ेमे शामिल हैं, मिशन सरपंच के आवेदन को सही तथ्य के साथ भरने को ग़लत प्रचारित कर रहा है तो धर्मांतरण विरोधी इसे विधिसम्मत बता रहे हैं। मिशन की चिंता स्वाभाविक है यदि जाति के कॉलम में सच दर्ज कर दिया जाएगा तो धर्मांतरित हो चुके लोगों को आदिवासी होने का लाभ मिलने में ही संकट हो जाएगा।
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