रायगढ़। बरमकेला तहसीलदार के खिलाफ एक गंभीर जांच सिर्फ इसलिए अटकी है क्योंकि सायबर सेल से एक ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच रिपोर्ट नहीं आई है। जांचकर्ता अधिकारी बयान लेने के बाद उसी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न को लेकर सरकार और न्यायालय दोनों बेहद गंभीर हैं। ऐसे मामलों में न तो जांच में देरी होनी चाहिए और न ही कार्रवाई में। रायगढ़ के बरमकेला तहसीलदार अनुज पटेल के खिलाफ महिला कर्मचारियों ने कलेक्टर से लिखित शिकायत की थी । इसमें आरोप लगाए गए थे कि काम खत्म होने के बाद भी बेवजह दफ्तर में रोका जाता था। कई तरह से उन्हें प्रताड़ित किया जाता था।

शिकायत के बाद पूर्व कलेक्टर भीमसिंह ने संयुक्त कलेक्टर अभिलाषा पैकरा को जांच का आदेश दिया था। अनुज पटेल को बरमकेला में ही पदस्थ रखा गया। जांचकर्ता अधिकारी ने महिला कर्मचारियों और तहसीलदार के बयान दर्ज कर लिए हैं। महिलाओं ने कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी थी जिसमें कुछ बातचीत रिकॉर्ड थी। इसकी जांच के लिए बिलासपुर सायबर क्राइम विभाग को रिकॉर्डिंग भेजी गई। इसकी रिपोर्ट कई महीनों से लंबित है। मामले में अब तक विधिवत कार्रवाई हो जानी थी, लेकिन अभी तक रिपोर्ट के कारण मामला अटका हुआ है। शिकायतकर्ता महिलाओं को अभी भी उसी जगह काम करना पड़ रहा है। अनुज पटेल को भी बरमकेला में ही कायम रखा गया है।
क्यों गंभीरता से नहीं होती जांच –
जिले में पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। महिला उत्पीड़न का मामला आने के बाद उस में जांच व सख्त कार्रवाई के बजाय जैसे-तैसे मामला दबाने की कोशिश की जाती है। इस बार तो तकनीकी दिक्कतों के कारण जांच अटक गई है। अब जिले में महिला कलेक्टर पदस्थ हैं तो शायद जांच पूरी हो जाए।
क्या कहती हैं सन्युक्त कलेक्टर –
ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच रिपोर्ट नहीं आई है । मिलते ही रिपोर्ट सौंप दी जाएगी – अभिलाषा पैकरा, संयुक्त कलेक्टर
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