जगन्नाथ बैरागी

रायगढ़:- बरमकेला विकासखंड मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर कि दुरी पर कोठीखोल क्षेत्र में स्तिथ शासकीय प्राथमिक शाला दमदमा ने इन दिनों अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जिम्मेदारो ने इन विषयों पर आँख बंद कर दिया है, खास बात तो यह है कि सरकारी स्कूल मे गरीब के बच्चे पढ़ाई करते हैं रसूखदारो के बच्चे तो ऊँची निजी संस्थान मे पढ़ाई करते हैं तो इनकी सुध लेने वाला कौन, गरीब वर्ग के बच्चे डरे सहमें शाला भवन के आँगन मे बैठने को मजबूर हैं।

विदित हो कि छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों मे शिक्षा का बेहत्तर माहौल देने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। दमदमा के प्राथमिक विद्यालय इतना जर्ज़र हो चूका है कि कभी भी गिर सकता है, लेकिन शिक्षा विभाग के लापरवाही से आज भी छात्र इसी जर्ज़र भवन के आँगन मे पेड़ के निचे बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं,यहाँ के शिक्षक और बच्चे तथा पालक गण खतरे कि आशंका को देखते हुए नया भवन बनवाने के लिए गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं होने से डर का माहौल बना हुआ है। शाला भवन का प्लास्टर गिरता रहता है जिससे कभी भी अनहोनी हो सकता है, बरान्दा मे एक साथ पांच क्लास तक के सभी बच्चों को पढ़ाई जा रही है, पढ़ाई काफ़ी प्रभावित हो रही है तथा इससे ग्रामीण काफ़ी आक्रोश नजर आ रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि विभाग को कई बार इसकी सुचना दी जा चुकी है परन्तु इनका सुध नहीं लिया जा रहा है जिससे बरसात के दिन होने के कारण बाहर मे साँप बिच्छी के काटने का भी डर बना हुआ है और पूरा बाउंड्री वॉल नहीं बनने से जानवर भी अंदर घुसते नजर आ रहे हैं जिससे बच्चों की जिंदगी खतरे में है।
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