रायगढ़: ताज़ातरीन मामला सारंगढ़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत भीखमपुरा का है,जहाँ विगत दिनों ग्रामीण द्वारा की गई शिकायत पर जनपद अधिकारी सारंगढ़ द्वारा जाँच अधिकारी नियुक्त कर जाँच करने हेतु निर्देशित किया गया था।जिन्होंने जाँच उपरांत पाया कि ग्रामीण ने सरपंच के खिलाफ़ जिन 9 बिंदुओं में शिकायत किया गया था वो सभी सच है तथा ग्राम पंचायत के उक्त सभी निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं पाई गई है।सरपंच द्वारा बिना निर्माण कार्य किए ही लगभग 10 लाख की राशि का आहरण कर लिया गया था, मजे की बात तो ये हैं की जब ग्रामीण ने शिकायत किया तब जाकर मामले का उजागर हुआ।



सुचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगने पर सचिव करता है टाल मटोल, ग्राम सचिव को नहीं है बिल व्हाउचर की जानकारी?
सुचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगने पर ग्राम सचिव द्वारा टालमटोल किया गया जबकि सचिव ग्राम पंचायत के जन सुचना अधिकारी होते हैं और उनको बिल व्हाउचर की जानकारी न होना बताया जो कि पूरा झोल झाल ही लगता है। वहीं जब जनपद अधिकारी द्वारा सरपंच को भी दो बार नोटिस जारी करके जब जानकारी चाहा गया तब सरपंच महोदय भी जानकारी देना उचित नहीं समझे।

रिकवरी के डर से सरपंच द्वारा लीपापोती कर गलतियों को छुपाने करवाया जा रहा है मरम्मत कार्य…
अब तो पूरा मामला एसडीएम सारंगढ़ महोदय के संज्ञान मे है और उनके द्वारा वसूली आदेश देने के बाद सरपंच द्वारा पुनः शासन को वर्षा ऋतू मे धोखा देने के उद्देश्य से कुछ मरम्मत कार्य को वसूली के डर से कराया जा रहा है, जिसकी शिकायत ग्रामीण द्वारा पुनः संबंधित अधिकारियों के संज्ञान मे लाया गया है।
अब देखना लाज़मी होगा कि क्या ऐसे भ्रष्ट सरपंच के खिलाफ पंचायत अधिनियम के तहत क्या कठोर कार्यवाही संबंधित अधिकारी करते हैं या उनके गलती पर पर्दा डालते हैं???


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