रायगढ़ : दो नाबालिग बच्चियों को नौकरी व पैसा देने का लालच देकर दिल्ली ले जाने और वहां उन्हें मानव तस्करों के हवाले करने वाले आरोपी को दी कोर्ट ने दिया आजीवन करावास….
रायगढ़। किरोड़ीमलनगर की दो नाबालिग बच्चियों को नौकरी व पैसा देने का लालच देकर दिल्ली ले जाने और वहां उन्हें मानव तस्करों के हवाले करने वाले आरोपी को फास्ट ट्रेक कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार मामले का संक्षेप यह है कि विगत 21 जनवरी 2016 को पीड़िता की माता ने कोतरा रोड थाने में इस आशय का रिपोर्ट दर्ज कराया था कि गिरधारी यादव के मकान किरोड़ीमलनगर वार्ड नंबर 6 में किराये से रहने वाले सरजान नाम का एक आदमी 6-7 माह पूर्व काम के बहाने उसकी नागालिग पुत्री उम्र 10 वर्ष और उम्र 14 वर्ष को दिल्ली ले गया था और कहीं छोड़कर आ गया है।
पूछताछ करने पर बच्चियों के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे रहा है । ऐसे में पुलिस ने शिकायत पर अपराध दर्ज करते हुए मामले को विवेचना में लिया और विवेचना के दौरान अपहृत बालिकाओं को बरामद कराने एक टीम को दिल्ली भेजा। इस मामले में पुलिस ने अभियुक्त चम्पई उर्फ चम्पा मुंडा पिता वीर सिंह निवासी झारखंड के जिला पश्चिम सिंहभूम ज्ञाना सोनवा को गिरफ्तार किया। पूछताछ के – दौरान पता चला कि आरोपी ने अपने साथी टुर्की, वीरेन्द्र , मोनिका व लखन बान्ड्रा के साथ मिलकर दोनों पीड़िता के माता-पिता को नौकरी व पैसा दिलाने का प्रलोभन देकर बहलाया फु सलाया और नाबालिग बच्चियों को दिल्ली ले जाकर उनका मानव व्यापार करने की कोशिश की।
14 साल की बच्ची की बेईज्जती करने की नियत से उसके साथ सोना पड़ेगा कहकर उसके साथ गलत काम करने का प्रयास कर छेड़छाड़ कर लैंगिक हमला भी किया। दोनों पीड़िता को उनकी इच्छा के विरूद्ध श्रम करने के लिए विवश किया गया। इस मामले में फास्ट ट्रेक कोर्ट की जज श्रीमती प्रतिभा वर्मा ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को धारा 363 , 34 के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास व 1 हजार रुपये अर्थदंड , धारा 370 , 34 के तहत आजीवन कारावास व 5 हजार रुपये अर्थदंड व धारा 374 , 34 के तहत 6 माह सश्रम कारावास व 500 रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।
अर्थदंड अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास की सजा का प्रावधान भी रखा गया है। सभी सजायें एक साथ चलेंगी। सजा के प्रश्न पर अदालत ने कहा कि आरोपी द्वारा 18 साल से कम उम्र की अवयस्क बालिका की गरीबी व बेरोजगारी की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें प्रलोभन देकर उनका मानव दुर्व्यापार किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में आरोपी को न्यूनतम दंड दिया जाना उचित नहीं है। आरोपी द्वारा अवयस्क बालिका के साथ ऐसा कृत्य किया गया है जिससे उपधारणा की जा सकती है कि वह नाबालिग के मानव दुर्व्यापार के कार्य में संलिप्त है। प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक मोहन सिंह ठाकुर ने पैरवी की।
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