8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जिज्ञासा मंच बिर्रा ग्रुप ने लिखे अपने विचार

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जितेंद्र तिवारी

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बिर्रा-प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जगह-जगह महिलाओं का सम्मान करते हुए महिला सशक्तिकरण पर अपना विचार रखते हैं।इसी क्रम में जिज्ञासा रायल ग्रुप (वाट्स अप ग्रुप) बिर्रा के एडमिन जितेन्द्र तिवारी ने ग्रुप मेंबर्स से महिला दिवस पर अपना विचार व्यक्त करने की पहल की।जिस पर ग्रूप के सदस्यों ने अपना विचार रखा है।इस संबंध में जिज्ञासा मंच के सहयोगी एडमिन रेखा सिंह जी ने लिखा है कि भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है,महिला का सम्मान सिर्फ इसलिए नही होना चाहिए कि वो एक महिला है

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बल्कि उनकी भी अपनी एक पहचान है , आज की महिला आश्रित नारी नही है वह स्वतंत्र एवं आत्मनिर्भर भी है । महिला दिवस मनाने का महत्वपूर्ण कारण महिला और पुरुषों में समानता बनाये रखना है। वहीं सक्रिय सदस्य *श्रीमती संगीता-योगेश उपाध्याय* ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कहा कि सुनने में तो बहुत अच्छा लगता है, परंतु जब इस मुद्दे पर एकांत में विचार किया जाए तो मन में एक सवाल जन्म लेता है कि आखिर ऐसी क्या दिक्कत थी, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को सम्मान देने के लिए एक दिन की घोषणा करनी पड़ी ? क्या इसका उद्देश्य शुरुआत से ही केवल महिलाओं को सम्मान देना था, या उन्होने अपनी परेशानियों से तंग आकार आक्रोश में इस दिन को मनाना शुरू किया ? क्या भारत की ही तरह संपूर्ण विश्व में भी महिलाओं को अपने अधिकार अपने सम्मान को पाने के लिए चुनोतियों का सामना करना पड़ा ?? आज हम अपने इस आर्टिकल से आपके इन सवालों का जवाब देने और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के संबंध में संपूर्ण जानकारी देने का प्रयत्न कर रहे है, उम्मीद करते है कि यह आपके लिए उपयोगी होगा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने के उद्देश्य समय के साथ और महिलाओं की समाज में स्थिति बदलने के साथ परिवर्तित होते आ रहे है. शुरुआत में जब 19 वीं शताब्दी में इसकी शुरुआत की गई थी, तब

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महिलाओं ने मतदान का अधिकार प्राप्त किया था, परंतु अब समय परिवर्तन के साथ इसके उद्देश्य कुछ इस प्रकार है.।महिला दिवस मनाने का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य महिला और पुरुषो में समानता बनाएं रखना है. आज भी दुनियां में कई हिस्से ऐसे है, जहां महिलाओं को समानता का अधिकार उपलब्ध नहीं है. नौकरी में जहां महिलाओं को पदोन्नति में बाधाओं का सामना करना पड़ता है, वहीं स्वरोजगार के क्षेत्र में महिलाए आज भी पिछड़ी हुई है.

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कई देशों में अब भी महिलाएं शिक्षा और स्वास्थ्य की दृष्टि से पिछड़ी हुई है. इसके अलावा महिलाओं के प्रति हिंसा के मामले भी अब भी देखे जा सकते है. महिला दिवस मनाने के एक उद्देश्य लोगों को इस संबंध में जागरूक करना भी है।राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में अब भी महिलाओं की संख्या पुरुषो से कई पीछे है और महिलाओं का आर्थिक स्तर भी पिछड़ा हुआ है. महिला दिवस मनाने का एक उद्देश्य महिलाओं को इस दिशा में जागरूक कर उन्हे भविष्य में प्रगति के लिए तैयार करना भी है।वहीं सहयोगी एडमिन *कु. प्रीति तंबोली ने समस्त मातृशक्ति को शुभकामनाएं दी और कहा कि-

मुस्कुराकर, दर्द भुलाकर*
*रिश्तों में बंद थीं दुनियां सारी !*
*हर पग को रोशन करने वाली*
*वो शक्ति हैं एक नारी!!* वहीं अपनी विचार में युवा छात्र विकास तिवारी ने कहा कि- *दिन की रौशनी ख्वाबों को बनाने में गुजर गई,रात की नींद बच्चों को सुलाने में गुजर गई!जिस घर में मेरे नाम की तख्ती भी नहीं,सारी उम्र उस घर को सजाने में गुजर गई!!* तभी तो कहा गया है- *यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:!!* जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं। जिज्ञासा रायल ग्रुप बिर्रा के सदस्यों में श्रीमती लता तिवारी,सुश्री पूजा किशोरी,श्रीमती नम्रता शर्मा,लक्ष्मीनारायण केंवट, डॉ ईश्वर प्रसाद शुक्ल,एफ एल साहू सरजी, श्रीमती अनिता सराफ,संजय तिवारी,फिरतराम साहू,पं तोषण तिवारी सहित कई सदस्यों ने नारी सम्मान पर अपना विचार व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दी हैं।अंत में यही कहना चाहूंगा कि- *नारी ही शक्ति है नर की,नारी ही शोभा है घर की!जब उसे उचित सम्मान मिले, तो घर में खुशियों के फुल खिले!!

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