इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ने बनाया व्हाट्सएप सीजी एग्रोसोल्यूशन डायसी ग्रुप…अब एक मैसेज से किसानों के समस्याओं का होगा हल….!
जगन्नाथ बैरागी
रायपुर। तकनीक का इस्तेमाल भलाई के लिए किया जाए, तो इंसान को तरक्की करने से कोई भी नहीं रोक सकता। बुजुर्गों की इस बात को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के वैज्ञानिक सही साबित कर रहे हैं।प्रदेश के किसानों की फसल संबंधी समस्याओं का निराकरण हो सके और उनकी फसल अच्छी हो, इसलिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने समन्वय केंद्रों (खाद-बीज केंद्र) के साथ मिलकर व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया है। इस ग्रुप में जिले और प्रदेश के किसानों के अलावा कृषि विवि के वैज्ञानिक भी जुड़े हैं। किसान फसल संबंध समस्या व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा करते है और वैज्ञानिक उन समस्याओं का समाधान निकालते हैं और किसान को उसे अमलीजामा पहनाने के लिए कहते है। कृषि वैज्ञानिकों के इस प्रयास से किसानों को इन दिनों में फसल में नुकसान का सामना नहीं करना पड़ रहा है।कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसान वैज्ञानिक मंच और किसान समाधान के नाम से बने ग्रुप में किसान जुड़े हुए है। ये किसान वर्चुअल रुप से वैज्ञानिकों से जुड़कर खुद की और साथी किसानों की फसल संबंधी समस्या का समाधान करवा रहे है। किसान वैज्ञानिक मंच को विवि प्रबंधन (IGKV) अपने स्तर पर चला रहा है। किसान समाधान ग्रुप विवि के वैज्ञानिक डॉ गजेंद्र चंद्राकर द्वारा अलग से चलाया जा रहा है। किसानों को कृषि विभाग में दौड़ धूप करने से बच रहे है। कौन सी फसल करना लाभकारी होगी। फसल खराब हो रही है और उसे दुरुस्त किस तरह किया जा सकता है? इन सब सवालो के जवाब वैज्ञानिक दे रहे है। कई बार फसल की खराबी का कारण पता लगने में वैज्ञानिको को परेशानी होती है, तो नजदीकी केंद्र की मदद विवि प्रबंधन (IGKV) के अधिकारियों ने बताया किसान वैज्ञानिक मंच में हर जिले के किसान जुड़े है। इस ग्रुप में किसान सवाल करता है, तो उसका जल्द से जल्द रिस्पांस वैज्ञानिकों को देना है। किसानों की समस्याओं का समाधान समय पर हो रहा है या नहीं, इसके लिए नोडल भी बनाया गया है। नोडल सीधे प्रबंधन को रिपोर्ट करता है।
27 जिलों में अलग-अलग ग्रुप बनाए गए
किसान समाधान ग्रुप के संस्थापक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर ने बताया कि ६ वर्ष पूर्व प्रदेश के 27 जिलों में अलग-अलग ग्रुप बनाए गए हैं। सीजी एग्रोसोल्यूशन डायसी कृषि आदान विक्रेता में 1250 सदस्य हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़ जैविक खेती के 245 सदस्य हैं। बॉयो मिशन ग्रुप में 350 सदस्य और लगभग 7000 सदस्य किसान शामिल हैं। कृषि मैदानी अमलों से संपर्क कर किसानों को नि:शुल्क सामयिक सलाह दी जाती है।
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