जगन्नाथ बैरागी

रायगढ़। अपने मजदूरों को एक झटके में बेसहारा छोड़कर चले जाने वाले मोहन जूटमिल मालिक को कुर्की का नोटिस भेजा गया है। तहसीलदार रायगढ़ ने हाईकोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए श्रमिकों का बकाया भुगतान करने के लिए जूट मिल की चल संपत्तियों को नीलाम करने का नोटिस भी दिया गया है। हालांकि अब जूटमिल की कमान पुराने मालिक के ही हाथ चली गई है। एक समय था जब सैकड़ों मजदूर परिवारों की जीविका मोहन जूट मिल से ही चलती थी, लेकिन अचानक से मिल बंद करके मालिक वापस चले गए। बैंकों से लिया गया कर्ज भी बहुत ज्यादा था। पूर्व एमडी पवन अग्रवाल का कहना था कि श्रमिकों के बार-बार हड़ताल से मिल को भारी नुकसान हो रहा था। इसलिए घाटे में मिल चलाना बेहद मुश्किल था। लेकिन मजदूरों का बकाया भुगतान नहीं किया गया।
श्रम न्यायालय में मजदूरों की ओर से केस दायर किया गया था। 63,64,800 रुपए का भुगतान करने लेबर कोर्ट ने आदेश किया, लेकिन जूट मिल के मालिकों ने हाईकोर्ट में अपील की। वहां से भी बकाया भुगतान करने का आदेश पारित हुआ था। आरआरसी के जरिए वसूली की जानी थी जिसकी प्रक्रिया अटकी हुई थी। राज्य सरकार ने दस लाख से ज्यादा राशि वाले आरआरसी प्रकरणों में जल्द कार्रवाई करने को कहा था। रायगढ़ तहसीलदार ने रकम वसूली के लिए पवन अग्रवाल डायरेक्टर मोहन जूट मिल्स एंड प्रॉपर्टीज प्रालि को रकम जमा करने का नोटिस भेजा था। कोई भी जवाब नहीं आने पर चल संपत्ति की कुर्की करने का नोटिस दिया गया था। जूट मिल की मशीनरी और दूसरे सामान की नीलामी की जा सकती है। इसमें सैकड़ों टन लोहे की मशीनें और दूसरे सामान हैं।
इनका वैल्युएशन 2013 में किया गया था। बैंकों का लोन हुआ एनपीए मोहन जूट मिल का केस एक स्टडी है। कैसे कॉरपोरेट लेवल पर बड़े-बड़े खेल होते हैं, यह पता चलता है। बैंकों ने मोहन जूट मिल को दिए गए कर्ज की वसूली नहीं होने पर इसे दिवालिया घोषित कर दिया। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत कुछ अन्य बैंकों की देनदारियां बढ़ती गई और लोन एनपीए हो गया। मिल के फाइनेंशियल क्रेडिटर एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड। NRCIL ने मोहन जूट मिल पर इनसाल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 के तहत मुकदमा दायर किया। पुराने मालिक की चतुराई, वापस मिली जूट मिल एआरसीआईएल ने करीब 60 करोड़ रुपए की रिकवरी के लिए केस किया था, जिसमें प्रिंसिपल एमाउंट करीब साढ़े 13 करोड़ रुपए का था। इस बीच सस्पेंड हो चुके प्रबंधन की ओर से पवन अग्रवाल ने आरसिल को एक प्रपोजल दिया, जिसमें वन टाइम सैटलमेंट के तहत ऑफर दिया गया। चर्चा के बाद 18.92 करोड़ रुपए में सहमति बन गई।
7 मई 2021 को एनसीएलटी ने आदेश भी पारित कर दिया। प्रबंधन के पवन अग्रवाल और अन्य ने आरसिल को सैटलमेंट प्रस्ताव दिया था। अप्रैल में हुए कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स की बैठक में यह प्रस्तुत किया गया। 60 करोड़ की कुल देनदारी को 18.92 करोड़ में समेट दिया गया, लेकिन अभी विद्युत विभाग का 1,04,23,334 रुपए का बिजली बिल बकाया है। मजदूरों के भुगतान के लिए मशीनें नीलाम होंगी।
क्या कहते हैं सुनील-
मोहन जूट मिल के मजदूरों का भुगतान करने आदेश हुआ था। आरआरसी के तहत वसूली की जा रही है। चल संपत्तियों की नीलामी की जाएगी।
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