सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कोसीर तहसील अंतर्गत धान उपार्जन व्यवस्था में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। तहसीलदार कोसीर द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन में धान टोकन के भौतिक सत्यापन में नियमों की अनदेखी और उच्चाधिकारियों के निर्देशों के उल्लंघन का स्पष्ट आरोप लगाया गया है।

प्रकरण पंजीकृत कृषक श्रीमती हीराबाई के टोकन सत्यापन से जुड़ा है। उनके पुत्र वीरेंद्र सिंह, पिता गुलाब सिंह, निवासी दहिदा द्वारा लिखित कथन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें बताया गया कि उनकी माता हीराबाई के नाम जारी टोकन क्रमांक टी. 4100940125602486 के अंतर्गत 93.60 क्विंटल धान, कुल 02 ट्रैक्टर में सुबह लगभग 09:00 बजे उनके मूल निवास से रवाना हुआ।
वीरेंद्र सिंह का कहना है कि इस धान का भौतिक सत्यापन हल्का पटवारी द्वारा उनके निवास पर न होकर समिति जशपुर में किया गया, जो नियमों के विपरीत है।
कृषक वीरेंद्र सिंह ने अपने कथन में यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी समस्त भूमि में धान की फसल लगाई है तथा उनका नाम जिला सहकारी समिति जशपुर में नामिनी के रूप में पंजीकृत है। इसके बावजूद, सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितता सामने आई है।
वहीं, हल्का पटवारी रोशन विश्वाल ने अपने बयान में कहा है कि उन्हें कुल 06 कृषकों के भौतिक सत्यापन हेतु निर्देशित किया गया था, जिनका सत्यापन घर-घर जाकर कर पंचनामा तैयार किया गया। शेष 01 कृषक का सत्यापन समयाभाव के कारण धान उपार्जन केंद्र के बाहर कर पंचनामा जारी किया गया।
पटवारी के अनुसार उक्त धान टोकन का सत्यापन उनके द्वारा किया गया।
हालांकि, कृषक, उनके वारिसान एवं स्वयं पटवारी के कथनों के विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया है कि भौतिक सत्यापन समिति परिसर में किया गया, जो कि स्पष्ट रूप से नियमों के विरुद्ध है और यह दर्शाता है कि सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई।
तहसीलदार कोसीर के प्रतिवेदन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि पटवारी द्वारा धान सत्यापन की कार्यवाही में लापरवाही की गई है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन है। यह कृत्य स्वेच्छाचारिता, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना तथा सौंपे गए दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही को दर्शाता है।
प्रकरण को गंभीर मानते हुए संबंधित पटवारी को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए, इस संबंध में 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी गई है।
इस घटना के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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