कृषि उपसंचालक के आह्वान पर किसानों ने ग्रीष्मकालीन धान से किया किनारा..1800 किसानों ने 1200 एकड़ में अपनाई दलहन–तिलहन व वैकल्पिक फसलें..जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम…
सारंगढ़। जिला कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे के मार्गदर्शन एवं कृषि उपसंचालक आशुतोष श्रीवास्तव के निर्देश पर जिले के तीनों विकासखंडों में किसानों को ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल से प्रेरित होकर जिले के लगभग 1800 किसानों ने 1200 एकड़ क्षेत्र में गेहूं, मक्का, चना, मटर, मूंग, उड़द, मसूर, सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी, तिवरा, साग-सब्जी, पाम ऑयल एवं अन्य लघु धान्य फसलों की बोनी की है।
जिले में बढ़ती जल समस्या को दृष्टिगत रखते हुए किसानों ने इस वर्ष फसल विविधीकरण एवं फसल चक्र के वैज्ञानिक सिद्धांतों को अपनाकर सराहनीय पहल की है। ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों को प्राथमिकता देकर कृषकों ने जल संरक्षण के साथ-साथ आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
शासन की योजनाओं से बढ़ा किसानों का उत्साह-
कृषि उपसंचालक आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि शासन द्वारा किसानों को उन्नत किस्म के बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, फसल बीमा सुविधा तथा उत्पादों के विपणन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। बीज निगम में बिक्री हेतु पंजीयन एवं सहकारी समितियों के माध्यम से फसल विक्रय की सुविधा मिलने से किसानों का उत्साह बढ़ा है।
किसानों ने सरसों, चना, गेहूं, तिल, लाखड़ी तथा साग-सब्जियों की खेती को अपनाया है। वहीं, जो किसान पूर्व में खेत खाली छोड़ देते थे, उन्होंने भी इस वर्ष दलहन-तिलहन फसलों के अंतर्गत क्षेत्र विस्तार कर उत्पादन में भागीदारी निभाई है।
बीजों का अंकुरण संतोषजनक, उत्पादन की पूरी उम्मीद-
जिले के प्रगतिशील किसानों ने बताया कि शासन से प्राप्त बीजों का अंकुरण अत्यंत संतोषजनक रहा है और फसलों से अच्छे उत्पादन की पूर्ण आशा है। फसल बीमा की सुरक्षा से उन्हें आर्थिक स्थिरता एवं आत्मविश्वास मिला है।
बरमकेला विकासखंड में 975 किसानों ने लगभग 502 एकड़ में धान के बजाय मोटे व वैकल्पिक फसलों की खेती की है।
जल संरक्षण के साथ आय संवर्धन में सहायक पहल-
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सारंगढ़, बरमकेला एवं बिलाईगढ़ विकासखंडों के किसानों का मानना है कि यह पहल जल संरक्षण के साथ-साथ आय संवर्धन में भी सहायक सिद्ध होगी। किसानों ने आने वाले वर्षों में भी इन फसलों को अपनाकर सतत एवं टिकाऊ कृषि पद्धति को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है।
कृषि उपसंचालक श्रीवास्तव के अनुसार—
सारंगढ़ ब्लॉक में 649 किसानों ने लगभग 437 एकड़ में गेहूं, मक्का, चना, मटर व मूंग की खेती की।
बरमकेला ब्लॉक में 975 किसानों ने 501 एकड़ से अधिक क्षेत्र में लघु धान्य फसलों की बोनी की।
बिलाईगढ़ ब्लॉक में 196 किसानों ने गेहूं, मक्का, चना, मटर, मूंग व उड़द की खेती अपनाई।
इससे खेतों की उर्वराशक्ति में वृद्धि के साथ किसानों की आय में भी इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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