सारंगढ़:वन्यजीवों के लिए भोजन, पानी और आश्रय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मद- 3943 के तहत वन्यजीव संरक्षण और विकास की योजनाएं प्रदेश में संचालित है।
घास भूमि का विस्तार कराने अच्छी किस्म की घास का विकास और विस्तार करके वन्यजीवों के लिए चारा उपलब्ध हो ऐसा शासन की सोच है।

सारंगढ़ के वन परिक्षेत्र गोमर्डा अभ्यारण के टमटोरा रेस्ट हाउस में 500000(5 लाख) खर्च बताकर घास नर्सरी लगाने एवं रख रखाव की बात विभाग द्वारा फाइल में बताई जा रही है!
लेकिन स्थल निरीक्षण करने पर वहां ना तो कोई घास हैँ न क्यारी..
कर्मचारीयों का कहना हैँ घास जुलाई में लगाया गया था शायद बरसात में खराब हो गयी..भला ऐसे कौन सी वैराइटी का घास लगाया गया जो बरसात में खराब हो जाती है?
वहीं एसडीओ श्री पांडेय का कहना है कि घास लगाए थे बीज निकाल लिए हैँ घास समाप्त हो गयी होगी..!
बीज कहाँ पर भंडारीत हैँ के सवाल पर उनके द्वारा जानकारी नहीं दी गयी..
अधिक जानकारी हेतु सारंगढ़ डीएफओ श्री अग्रवाल से रूबरू हुए तो काम और सिर दर्द का की बात कह कर टालमटोल करने लगे..
कुछ सवाल-
जुलाई में लगे घास नवंबर में कैसे नस्ट हो सकता है?
बहुवर्षीय घास की क्यारी से घास गायब कैसे?
क्यारी का नाम निशान नहीं?
घास का बीज अगर निकाला गया है तो कहाँ है, जिसका जवाब देते जिम्मेदार अधिकारी कतरा रहे हैँ?
ये एक मामला है पुरे जिलेए घास लगाने और क्यारी के देख भाल के नाम से कितने लाख की राशि का विभाग द्वारा दुरूपयोग किया गया होगा..?
घास भूमि का विस्तार कराने अच्छी किस्म की घास का विकास और विस्तार हेतु करती है, जिससे वन्यजीवों के लिए चारा उपलब्ध हो।
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