छत्तीसगढ़ का अनोखा लिंगेश्वरी माता मंदिर: भक्तों की आस्था का केंद्र…
अनेक मंदिर हैं, लेकिन कुछ अपनी अनोखी पहचान के लिए जाने जाते हैं। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में स्थित लिंगेश्वरी माता का मंदिर भी ऐसा ही एक स्थान है।
यहां भगवान शिव का एक शिवलिंग माता के रूप में प्रतिष्ठित है। इस मंदिर की एक खासियत यह है कि यह साल में केवल एक बार, और वह भी सिर्फ 12 घंटों के लिए खुलता है। आइए, इस मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियों पर नजर डालते हैं।
लिंगेश्वरी माता मंदिर की अनोखी बातें
- लिंगेश्वरी माता का मंदिर कोंडागांव जिले के आलोर गांव से 3 किलोमीटर दूर झांटीबन में स्थित है। यह मंदिर एक ऊंची गुफा में बना हुआ है, इसलिए भक्त यहां खड़े होकर नहीं, बल्कि रेंगकर माता के दर्शन करते हैं।
- यह मंदिर हर साल भादो महीने की नवमी तिथि के बाद आने वाले पहले बुधवार को खोला जाता है और केवल 12 घंटे के लिए खुला रहता है। इस दौरान दूर-दूर से सैकड़ों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं।
- यहां खीरे का प्रसाद चढ़ाया जाता है, और मान्यता है कि इसे चढ़ाने से सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही चारों ओर खीरे की खुशबू फैल जाती है, और बाहर प्रसाद के लिए बड़ी मात्रा में खीरा बिकता है।
- जिन दंपत्तियों को संतान सुख नहीं मिल रहा, उन्हें यहां आकर माता को खीरे का प्रसाद चढ़ाना चाहिए। इसके बाद उन्हें खीरा अपने नाखूनों से तोड़कर आधा-आधा ग्रहण करना चाहिए, जिससे उनकी सूनी कोख भर जाएगी।
- चूंकि यह मंदिर साल में केवल एक बार खुलता है, यहां भारी भीड़ होती है। इस स्थिति को संभालने के लिए मंदिर समिति और जिला प्रशासन पूरी तैयारी करते हैं, और सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात रहते हैं।
- हर साल जब मंदिर खुलता है, तो गुफा के अंदर रेत में उभरे पदचिन्हों के आधार पर पेनपुजारी सालभर की भविष्यवाणी करता है। हर वर्ष इसमें विभिन्न जीव-जंतुओं के पदचिन्ह उभरते हैं।
- उदाहरण के लिए, रेत पर कमल का निशान धन-संपत्ति में वृद्धि, हाथी के पैरों का निशान समृद्धि, घोड़े के खुर का निशान युद्ध और कला, बिल्ली के पैरों का निशान भय, बाघ के पैरों का निशान जंगली जानवरों का आतंक और मुर्गी के पैरों का निशान अकाल दर्शाता है।
- लिंगेश्वरी माता का मंदिर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थित है, जिससे कुछ लोग यहां आने से हिचकिचाते हैं। लेकिन सच्चे भक्त बिना किसी डर के यहां आते हैं।
- इस मंदिर में एक शिवलिंग है, लेकिन मान्यता के अनुसार यहां भगवान शिव माता के रूप में विराजित हैं। यह शिव और शक्ति का समन्वित स्वरूप है, जिसके कारण इसे लिंगाई माता कहा जाता है।
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