‘लड़की ने खुद भेजी फ्रेंड रिक्वेस्ट’ हाईकोर्ट ने बोला- रेप नहीं, ये आपसी प्रेम, CAF जवान की सजा रद्द…
हाईकोर्ट ने बस्तर के CAF (छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स) के जवान रूपेश कुमार पुरी को रेप के आरोप से बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की पीठ ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बस्तर (जगदलपुर) द्वारा 21 फरवरी 2022 को सुनाए गए 10 साल की सजा और 10 हजार रुपये के जुर्माने के आदेश को निरस्त कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला बस्तर जिले में लंबे समय से सुर्खियों में था। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पहले आरोपी को गंभीर आरोप में दोषी ठहराया था और उसे कठोर सजा सुनाई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले की पुनः सुनवाई के बाद पाया कि यह मामला जबरन यौन शोषण का नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और सहमति पर आधारित था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मामले में प्रस्तुत प्रमाण और गवाहों के बयानों से यह सिद्ध नहीं होता कि आरोपी ने किसी प्रकार का बल प्रयोग किया। अदालत ने कहा कि आरोपी और पीड़िता के बीच संबंध परस्पर सहमति और समझौते पर आधारित था। इस आधार पर न्यायालय ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और आरोपी को बरी कर दिया।
वकीलों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला न्यायिक विवेक और तथ्यों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में सटीक तथ्यों और सहमति के प्रमाण का महत्व बेहद होता है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि उसके खिलाफ पर्याप्त और ठोस सबूत न हों।
CAF जवान रूपेश कुमार पुरी के पक्ष में हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद उनके परिवार और समर्थक काफी राहत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक समाज और मीडिया में इस मामले को लेकर चल रही चर्चा ने उनके परिवार पर मानसिक दबाव डाला। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद मिली है।
वहीं, पीड़िता और उनके परिवार के वकीलों ने भी अदालत के निर्णय का सम्मान करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में हर पक्ष को अपने बयान और साक्ष्यों का मौका मिलता है। उन्होंने बताया कि कानून के तहत उच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम और निष्पक्ष माना जाता है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि कानूनी प्रक्रिया में तथ्यों और प्रमाणों का महत्व सर्वोपरि होता है। किसी भी प्रकार के आरोप को बिना ठोस सबूत के दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह निर्णय बस्तर के CAF जवान रूपेश कुमार पुरी के पक्ष में आया है और इसे कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला आपसी सहमति और प्रेम का था, न कि जबरन यौन शोषण का। इससे न केवल आरोपी को न्याय मिला है, बल्कि यह भविष्य में ऐसे मामलों में सहमति और प्रमाण की अहमियत को भी रेखांकित करता है।
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