धार्मिक, सामाजिक और राजनितिक कार्याकर्मों में डीजे और धूमाल से होने वाले शोर और ध्वनि को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। 22 सितम्बर को जनहित याचिका पर हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी.गुरु की बेंच ने आदेशित किया है कि कोलाहल अधिनियम और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियम के अंतर्गत प्रभावी नियंत्रण के लिए आयोजनों के दौरान सडकों पर लगे कैमरे के सीटीवी फुटेज को संरक्षित किया जाए ताकि ध्वनि विनियमों के किसी भी उल्लंघन का पता लगाया जा सकें।

इस संबंध में मुख्य सचिव को कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने और सभी आवश्यक कार्रवाई करने के आदेश भी दिए गए हैं।
याचिका में उपरोक्त आदेश तब दिए गए जब रायपुर के याचिकाकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता की तरफ से रायपुर में गणेश विसर्जन के दौरान लगभग 50 से 60 डीजे बजाने की बात बता कर रायपुर की सडकों पर लगे ट्रैफिक विभाग के कैमरों की रिकॉर्डिंग संरक्षित करने का अनुरोध किया गया था, ताकि ध्वनि प्रदूषण के नियमों के उलंघन का पता लगाया जा सके और ध्वनि प्रदूषण की मानिटरिंग की जा सके। डॉ. गुप्ता ने चर्चा में बताया कि इसी जनहित याचिका के दौरान बनाई गई समिति को छत्तीसगढ़ शासन के विधि विभाग ने स्पष्ट रूप से बताया है कि मोटर यान अधिनियम 1988 की धाराओं का परिवहन विभाग द्वारा कड़ाई पूर्वक पालन सुनिश्चित कराए जाने से वाहनों में डीजे सिस्टम लगाकर ध्वनि प्रदूषण फैलाए जाने का पूर्ण रूप से निवारण हो सकता है।
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