महासमुंद – एकलव्य स्कूल जिन्हें एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल्स (EMRS) भी कहते हैं की स्थापना साल 1997-98 में की गई थी. ये स्कूल खासतौर पर पिछड़ी जाती के छात्रों के लिए बनाए जाते हैं ताकि उन्हें पढ़ाई के बेहतर अवसर प्रदान किए जा सकें. ये स्कूल केवल एजुकेशन पर नहीं बल्कि ओवर-ऑल डेवलेपमेंट पर फोकस करते हैं. ये स्कूल राज्य सरकारों के अंडर में आते है जिन्हें इनकी स्थापना के लिए केंद्र सरकार द्वारा फंड दिया जाता है।
छत्तीसगढ़ आदिम जाति कल्याण, आवासीय एवं शैक्षणिक संस्थान समिति की ओर से संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में शिक्षण सत्र 2024-25 में कक्षा छठवीं में प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। जिसमें हज़ारो बच्चों ने भाग लिया था। जिसमें सरायपाली विकासखंड से भी सैकड़ो बच्चे परीक्षा मे सम्मिलित हुए थे।
सरायपाली विकास खंड के छोटे से गाव ग्राम पंचायत दर्राभाटा के शासकीय प्राथमिक शाला दर्राभाटा पढ़ने वाले 02 विद्यार्थीयो का 6 वीं कक्षा मे चयन होना गौरव की बात है।
सबीना बरिहा पिता – गोपाल बरिहा ने 6 वां रैंक और बैजंती बरिहा वल्द आनंद राम बरिहा 19 वी रैंक प्राप्त कर स्कूल के साथ सरायपाली अंचल का बाम बढ़ाया है।
शिक्षकों के उचित मार्गदर्शन से मिली सफलता –
छोटे से गाँव के सरकारी स्कूल से 02 छात्राओं के चयन पर जब मीडिया टीम ने छात्राओं के परिवार की संपर्क किया तो उनका कहना था कि हमे एकलव्य स्कूल के बारे मे कोई जानकारी हि नही थी ना ही हमने कभीबीस्का नाम सुना था। वो तो हमारे प्रधान पाठक दयासागर नायक ने हमे बताया और उन्होंने ही बच्चो को इसके लिए प्रेरित कर उचित मार्गदर्शन दिया साथ ही बच्चों पर मेहनत की जिसके परिणाम स्वरूप हमारे बच्चों का चयन हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान पाठक नायक स्कूली समय के अलावा भी गाँव के सभी बच्चों को पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय देते हैँ यहाँ तक गर्मी छुट्टी मे भी उनका पुरा फोकस बच्चों एक रहता है, जिसका परिणाम ग्रामीण आदिवासी बच्चों को मिलता है।

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