विधानसभा चुनावी नतीजे आने के हफ्ते भर बाद भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) राजस्थान में मुख्यमंत्री नहीं चुन सकी है. बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी के चलते होने वाले नुकसान से बचने के इरादे से सोच-समझकर फैसला लिया जा रहा है.
वहीं आगामी लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) की तैयारियों को भी इस देरी की एक प्रमुख वजह है. इन सबके बीच, राजस्थान में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ का एक बयान सामने आया है.
राजस्थान में सीएम पद को लेकर जारी सस्पेंस के बीच कालीचरण सराफ ने कहा, कांग्रेस को अपना सीएम तय करने में कम से कम 16 दिन लग गए और पार्टी में तानाशाही चल रही है. मंत्री ने कहा भाजपा नेताओं में लोकतंत्र है, मुख्यमंत्री चुनने के लिए पार्टी ने पर्यवेक्षक चुने हैं. वे आएंगे और विधायकों की राय लेंगे और उसके बाद रिपोर्ट हाईकमान को दी जाएगी. इसके बाद हाईकमान जो भी निर्णय लेगा उससे सभी सहमत होंगे.

राजस्थान में एक सीएम, दो डिप्टी CM
प्रदेश में मुख्यमंत्री चुनने में हो रही देरी की एक वजह लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सामाजिक और राजनीतिक गुणागणित को साधना भी है. ऐसे में पार्टी राजस्थान में मुख्यमंत्री के साथ दो उप मुख्यमंत्री भी बना सकती है और इन तीन पदों पर राजपूत, ब्राह्मण, मीणा और जाट समाज के नेताओं को बैठा कर इन समुदायों को बीजेपी से जोड़े रख सकती है. इसके अलावा पार्टी स्पीकर के तौर पर किसी दलित महिला विधायक को मौका देते हुए इस वर्ग को भी साधने की कवायद कर सकती है.

