छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण के मतदान में मंगलवार को 20 में से बस्तर की 12 विधानसभा सीट पर भी चुनाव हुए। बस्तर जिले के चांदामेटा गांव को सुरक्षा बल ने दो वर्ष पहले नक्सलियों से मुक्त कराया था।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सीमा पर तुलसीडोंगरी से सटा पहाड़ियों के ऊपर बसा यह गांव इससे पहले पूरी तरह से नक्सलियों के कब्जे में था। मंगलवार को इस गांव में पहली बार मतदान हुआ तो ग्रामीणों ने लोकतंत्र के महापर्व में अपनी भागीदारी निभाने जमकर उत्साह दिखाया। गांव के दो दर्जन पूर्व नक्सली जो कभी लोकतंत्र विरोधी थे, उन्होंने भी वोट डालकर उंगलियों पर ‘लोकतंत्र की स्याही’ लगाई। अब तक शून्य मतदान वाले इस गांव के 327 मतदाता में 212 ने मतदान किया, इसमें 104 पुरुष व 108 महिलाओं ने वोट डाला।

नक्सल प्रकरण में पांच वर्ष की सजा काटने के बाद पिछले सप्ताह जेल से छूटे मंगलू पोड़ियामी उंगली की स्याही दिखाते हुए बोले, पहली बार वोट दिया हूं!, उसने बताया, जब वह जेल गया था, गांव में सड़क, बिजली, हैंडपंप, स्कूल कुछ नहीं था। गांव में नक्सली रहते थे। अधिकतर ग्रामीण नक्सल संगठन से जुड़ चुके थे। उनकी अनुमति के बिना बाहर का कोई व्यक्ति न गांव आता था, न गांव का व्यक्ति बाहर जा सकता था। जेल से छूटने के बाद यहां पहुंचे तो गांव पूरी तरह से बदल चुका है। नक्सलियों का नामोनिशान मिट चुका है। लोगों की विचारधारा बदल गई है। लोग अब गांव का विकास चाहते हैं, इस बदलाव से ग्रामीणों के साथ वह भी खुश है। वह मानता है कि नक्सलवाद के अंधेरे ने उसका जीवन बर्बाद कर दिया, पर अब उम्मीद जगी है कि उसके बच्चे लोकतंत्र के उजाले में जिंदगी बिताएंगे।

बस्तर में 126 ऐसे गांव जहां पहली बार हुआ मतदान
बस्तर में विगत चार वर्ष में सुरक्षा बल के 65 कैंप स्थापित करने के बाद 650 से अधिक गांव नक्सल प्रभाव से मुक्त कराया गया है। निर्वाचन आयोग ने बस्तर में मतदान प्रतिशत बढ़ाने 2943 मतदान केंद्र बनाए हैं, जिनमें से 1254 नक्सल संवेदनशील है। इसमें 650 से अधिक केंद्र में त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में मतदान हुआ। 126 नए मतदान केंद्र खोले गए, जिनमें 40 विस्थापित केंद्र को मूल गांव में खोला गया है। चांदामेटा सहित सिलगेर, झीरम, मिनपा सहित दर्जनों गांव में इस बार मतदान हुआ। मतदाताओं में भी जमकर उत्साह दिखाई दिया।
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