छत्तीसगढ़:प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों को 15 दिन के भीतर देनी होगी आर्थिक मदद….
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में प्राकृतिक आपदा से पीड़ित लोगों को राहत पहुंचाने और क्षति के विरुद्ध आर्थिक सहायता पहुंचाने के नियमों में कई फेरबदल किए हैं। अब प्राकृतिक आपदा से हुई हानि के लिए अगर मांग संख्या 58 मुख्य शीर्ष 2245 में यदि आवंटन उपलब्ध न हो तो कलेक्टर शासन से आवंटन प्राप्त होने की प्रत्याशा में पीड़ितों को तत्काल राहत राशि उपलब्ध कराने के इरादे से एक करोड़ रुपए तक की राशि आहरित करने का आदेश दे सकेंगे।
इसके साथ ही कलेक्टरों को शासन से आवंटन उपलब्ध कराने के लिए तत्काल पत्र भेजना होगा।
ये है मामला
राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदा जैसे अतिवृष्टि, ओला, पाला, तुषारपात, शीतलहर, डिड्डी, बाढ़, सूखा, आंधी-तूफान, भूकंप, भू-स्खलन, बादल फटने, मिट्टी या पहाड़ों के खिसकने, सुनामी, कीट प्रकोप, लू, अग्नि दुर्घटना से फसल, जनहानि, तथा पशुहानि जैसी आपदा में पीड़ितों को राहत पंहुचाने और आर्थिक सहायता पंहुचाने के लिए नए नियम बनाए हैं। ये नियम 1 दिसंबर 2022 से राज्य में लागू किए गए हैं। इन नियमों में कई नए एवं महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
एक व्यक्ति भी प्रभावित तो दे सकता है आवेदन
इस नियम के मुताबिक अगर प्राकृतिक प्रकोप से किसी किसान या किसी व्यक्ति विशेष को ही क्षति हुई है तो वह भी अपने क्षेत्र के तहसीलदार को सहायता राशि के लिए आवेदन दे सकता है, लेकिन खास बात ये है कि व्यापक आपदा के मामले में प्रभावित व्यक्तियों को आवेदन देना अनिवार्य नहीं होगा। ऐसे मामलों में राजस्व कर्मी स्वप्रेरणा से प्रभावित क्षेत्र का सर्वेक्षण कर आर्थिक सहायता के प्रतिवेदन तैयार करेंगे। क्षति दिनांक से 30 दिनों के भीतर इस संबंध में प्रतिवेदन देना होगा। अगर देर हुई तो हर दिन के लिए स्पष्टीकरण देना अनिवार्य होगा।
पोर्टल पर आवेदन दो दिनों में हाेंगे अपलोड
इस प्रकार राजस्व कर्मियों द्वारा जो आवेदन-प्रतिवेदन मिलेंगे, उनका पंजीयन तहसीलदार, नायब तहसीलदार द्वारा राजस्व न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए निर्धारित वेब पोर्टल पर दो दिनों के भीतर अपलोड करेंगे। इनकी जांच के बाद पीड़ितों को पात्रतानुसार आर्थिक सहायता राशि का निर्धारण किया जाएगा।
देर की तो राजस्व अफसरों पर रोज लगेगा जुर्माना
नए नियम में ये प्रावधान है कि यदि सहायता राशि तहसीलदार के वित्तीय अधिकार की सीमा में है तो 10 दिनों के भीतर सहायता राशि देनी होगी। यदि तहसीलदार के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला है तो एसडीएम, कलेक्टर, कमिश्नर या शासन की स्वीकृति ली जाएगी। पीड़ितों को सहायता राशि आवेदन, प्रतिवेदन के 15 दिनों के अंदर अनिवार्य रूप से मिले, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। विलंब की स्थिति में संबंधित राजस्व अधिकारी व्यक्तिगत तौर पर उत्तरदायी होंगे। एक माह से अधिक समय तक लंबित प्रकरणों में शासन दोषी राजस्व अधिकारियों पर 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाएगा। यह राशि अधिकतम 25 हजार रुपए तक होगी।
पीड़ितों को बैंक अकाउंट में मिलेगी राशि
इस नियम व प्रक्रिया के तहत प्राकृतिक आपदा से पीड़ित व्यक्तियों को उनके बैंक खातों में राशि दी जाएगी यानी उन्हें डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम के तहत राशि दी जाएगी। सहायता राशि देने के लिए सरकार ने अधिकारियों के वित्तीय अधिकार भी तय किए हैं। संभागीय आयुक्त और कलेक्टर 15 लाख रुपए तक, अनुविभागीय अधिकारी 4 लाख और तहसीलदार 2 लाख रुपए तक राशि दे सकेंगे। अगर किसी की झोपड़ी, पशुशाला नष्ट हो गई हो तो उसे 15 दिनों के भीतर निशुल्क बांस-बल्ली घर पहुंचाकर उपलब्ध कराई जाएगी।
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