इस छिपकली की कीमत है 1 करोड़, भारत मे भी पाई जाती है यह छिपकली, एड्स, कैंसर एवं नपुंसकता भगाने वाली दवाई मे होता है इसका उपयोग….
पूर्णिया में दुलर्भ प्रजाति की 1 करोड़ की छिपकली जब्त की गई है. पुलिस ने 2 लोगों को गिरफ्तार किया है. दवा दुकान की आड़ में दुर्लभ प्रजाति की छिपकली की तस्करी की जा रही थी. इस छिपकली की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी कीमत है डिमांड भी ज्यादा है.
ये टोके गेको नस्ल की छिपकली बताई जा रही है. यह भी बताया जा रहा है कि टोके गेको नस्ल की छिपकली को गुड लक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. साथ ही इससे दवाईयां बनती हैं. पुलिस ने जब्त छिपकली को वन विभाग को सौंपा दिया है.
दरअसल, एसडीपीओ आदित्य कुमार ने कहा कि गुप्त सूचना मिली कि बायसी पूर्व चौक पर एक दवा दुकान में दुर्लभ प्रजाति के छिपकली की तस्करी की जा रही है. जब छापामारी की गई तो वहां दवा दुकान से काले रंग की टोकाय गायको नस्ल की छिपकली बरामद की गई. कई प्रकार की दवाईयां बनाने के लिए इस छिपकली का इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही 50 पैकेट कोडन युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप भी बरामद किया गया है.मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. इनसे पुलिस ने 5 किलो गांजा भी पकड़ा है.
मिली जानकारी के अनुसार इस छिपकली के उपयोग से नपुंसकता, एड्स कैंसर जैसी बीमारियों की दवाई बनाई जाती है. इस छिपकली की दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में बहुत ज्यादा मांग है ये छिपकली दक्षिण-पूर्व एशिया, बिहार, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, पूर्वोत्तर भारत, फिलीपींस नेपाल में ही पाई जाती है.
: ये टोके गेको नस्ल की छिपकली बताई जा रही है. यह भी बताया जा रहा है कि टोके गेको नस्ल की छिपकली को गुड लक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. साथ ही इससे दवाईयां बनती हैं. पुलिस ने जब्त छिपकली को वन विभाग को सौंपा दिया है.
दरअसल, एसडीपीओ आदित्य कुमार ने कहा कि गुप्त सूचना मिली कि बायसी पूर्व चौक पर एक दवा दुकान में दुर्लभ प्रजाति के छिपकली की तस्करी की जा रही है. जब छापामारी की गई तो वहां दवा दुकान से काले रंग की टोकाय गायको नस्ल की छिपकली बरामद की गई. कई प्रकार की दवाईयां बनाने के लिए इस छिपकली का इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही 50 पैकेट कोडन युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप भी बरामद किया गया है.मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. इनसे पुलिस ने 5 किलो गांजा भी पकड़ा है.
मिली जानकारी के अनुसार इस छिपकली के उपयोग से नपुंसकता, एड्स कैंसर जैसी बीमारियों की दवाई बनाई जाती है. इस छिपकली की दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में बहुत ज्यादा मांग है ये छिपकली दक्षिण-पूर्व एशिया, बिहार, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, पूर्वोत्तर भारत, फिलीपींस नेपाल में ही पाई जाती है.
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