जगन्नाथ बैरागी

रायगढ़ । बोगस खरीदी कर शासन को भारी नुकसान पहुंचाने वाली समितियों की सूची इस बार लंबी होगी। इसमें पहला नाम खडग़ांव180 का आ गया है। धान और बारदाने में कमी के कारण समिति में करीब 58 लाख की गड़बड़ी पाई गई है। कलेक्टर भीम सिंह के आदेश पर धरमजयगढ़ थाने में प्रबंधक, ऑपरेटर समेत संचालक मंडल पर धारा 409, 34 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।
यह लगातार दूसरा साल है जब रायगढ़ जिले में धान खरीदी केंद्रों में भारी नुकसान हो रहा है। सरकार ने धान का भुगतान तो कर दिया लेकिन उठाव के समय वह धान समिति से गायब है। धान की कमी के कारण शासन को पिछले साल करोड़ों का नुकसान हो चुका है। अब 20-21 में हुई खरीदी का भी नुकसान सामने आने लगा है। प्रशासन ने धान की भरपाई के लिए केंद्रों को बहुत अवसर दिए लेकिन अब और मोहलत नहीं दी जा सकती क्योंकि तीन महीने में फिर से खरीदी प्रारंभ होनी है। इसलिए अब कमी वाली समितियों में कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में धरमजयगढ़ ब्लॉक के खडग़ांव180 उपार्जन केंद्र में आई 2241 क्विंटल धान कमी कीमत 56,02,500 रुपए, बारदाना कमी 14766 नग कीमत 2,21,490 रुपए कुल 58,23,990 रुपए की क्षति सरकार को पहुंचाई गई। मतलब इतना धान खरीदी होने के बाद समिति में मिला ही नहीं। बोगस एंट्री कर धान कीखरीदी हुई लेकिन हकीकत में उतना धान समिति में आया ही नहीं। जांच प्रतिवेदन के आधार पर धरमजयगढ़ थाने में खडग़ांव180 समिति अध्यक्ष अध्यक्ष रविनारायण राठिया, प्रबंधक कृपाराम राठिया, डाटा एंट्री ऑपरेटर अनिल कुमार राठिया, बारदाना प्रभारी कुलदीप राठिया सहित संचालक मंडल के सदस्यों के विरुद्ध धारा 409, 34 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। सहायक खाद्य अधिकारी चितंरजन सिंह ने अपराध पंजीबद्ध करवाया।
खरीदी के दौरान खुली छूट, अब भी 22 केंद्र शेष:-
वर्ष 19-20 में तीन समितियों में करोड़ों की कमी आई थी। इस बार 22 केंद्रों में करीब 19 हजार क्विंटल धान की कमी दिखाई जा रही है। अभी भी इसकी भरपाई करने के लिए प्रयास हो रहे हैं। खरीदी के दौरान राजनीति दखल के कारण समितियों में कोई कड़ाई नहीं की जाती। इसलिए धान खरीदी में बोगस एंट्री की जाती है। वही बाद में शॉर्टेज के रूप में सामने आता है।
धान खरीदी केंद्रों में अवैध कमाई के लिए रिक्त रकबे पर धान खरीदी की जाती है। संबंधित किसान को कहा जाता है कि वह बोनस की पूरी रकम रख ले। केवल मूल समर्थन मूल्य ही दे दे। किसान भी बिना धान बेचे प्रति क्विंटल 400 से 500 रुपए कीलालच में हामी भर देता है। शॉर्टेज आता है तो रबी का धान 1200 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदकर भर दिया जाता है। या सीधे मिलर को इतनी रकम दे दी जाती है।
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