जगन्नाथ बैरागी

रायगढ़: सरकार भले ही सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने को लेकर सख्त है। लेकिन सारंगढ़ के बीएमओ श्री सिदार वर्षो से प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। सारंगढ़ अस्पताल में सेवा वह केवल इस लिए कर रहे हैं ताकि मरीज उन तक पहुंचे और वह उन्हें अपने घर के निजी क्लिनिक में बुलाकर उनकी जेब खाली कर सकें। सीएमओ श्री केशरी स्थिति से वाकिफ है, इसके बावजूद अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। सूत्रों की माने तो बीएमओ सिदार द्वारा हॉस्पिटल मे मरीजों को अस्पताल मे ना रहने पर घर बुलाया जाता है और मरीजों से बकायदा 200 रुपये चार्ज लिया जाता है। गरीब मजदूर अपने परिजनों के स्वास्थ्य लाभ के लिए मजबूरी मे 200 रुपये देने मे विवश होते हैँ लेकिन ना तो निष्ठूर बीएमओ के हृदय मे मरीजों की परिस्थिति को देखकर कोई दया भाव आता है ना हीं माथे पर शिकन! बल्कि पैसे को देखते ही एक कुटिल मुस्कान जरूर फैल जाती है।

हड़ताल के कारण उप स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लग गए है ऐसे मे विकास खंड चिकित्सा अधिकारी की अहमियत और बढ़ जाती है घर ऐसी नाजुक अवस्था मे समस्त विकासखंड के लोगो के स्वास्थ्य का ध्यान कुछ ज्यादा हीं समर्पित होकर रखा जाए ताकि जनता का डॉक्टर्स के प्रति देवत्व भाव बरकरार हैं, लेकिन सारंगढ़ मे स्वयं बीएमओ पद मे पदस्त डॉक्टर सिदार उलटी गंगा बहाने और जेब भरने मे माहिर जान पड़ते हैँ। बीएमओ साहब तो निजी क्लीनिक में इलाज करने में व्यस्त है जबकि साहब चाहते तो समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बैठकर इलाज कर सकते है किंतु साहब को पैसा कमाना ही मुख्य मकसद जान पड़ता है। मरीजों की माने तो जितना नियमानुसार समय उन्हे अस्पताल मे देना है उतना दे दें तो कोई मरीज के जेब मे बोझ ना पड़े, लेकिन ऐसे मे साहब का तिजोरी कैसे भरे इसलिए साहब अस्पताल सिर्फ खाना पूर्ति के लिए जाते हैँ और घर को निजी क्लिनिक बनाकर खुलेआम आम जनता के जेब का भारब्कम करने मे लगे रहते हैँ।
सारंगढ़ समुदायिक स्वास्थ केंद्र का हाल हुआ बदहाल-

चूंकि साहब तो निजी क्लिनिक में लोगों का इलाज करने में लगे हुये है वो ऐसे मे अस्पताल का रोजाना भला कौन करेगा? रोजाना जितने मरीज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जाते है उतने मरीज बीएमओ सिदार साहब के निजी क्लिनिक में इलाज के लिए जाते है! क्यूंकि अब सारंगढ़ मे प्रायः सभी को पता है की डॉक्टर सिदार अस्पताल टाइम मे भी घर के निजी क्लिनिक मे मरीजों हक चेकअप करते मिल जाएंगे। भले ही 200 रुपया देना पड़े लेकिन जल्दी इलाज हो जाए समझकर गरीब बेबस जनता भी डॉक्टर सिदार के निजी क्लिनिक जाने मजबूर हो जाते हैँ। विदित हो स्वास्थ्य केंद्र से बीएमओ साहब की घर की दूरी मुश्किल से लगभग 200 मीटर की होगी और प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उनके निवास स्थान जाकर प्राइवेट इलाज कराते है अगर बीएमओ साहब जितनी बखूबी से अपने निजी स्थान कर इलाज करते है उतने ही सिद्द्त से अगर हॉस्पिटल में रहकर इलाज करते तो सारंगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थित रायगढ़ जिले मे सबसे उच्च स्थान पर होता लेकिन क्या करे ? बीएमओ साहब तो बाप बढ़े ना भैया सबसे बड़ा रुपैया के कहावत को सच करने पर जी जान से लगे हैँ। श्री सिदार अपने निजी क्लिनिक मे सर्दी ,बुखार,सीने मे दर्द,पेट मे दर्द ,जैसे छोटी बीमारियों के चेकअप का भी 200 रुपये चार्ज करते हैँ जबकि अस्पताल मे उन्हे फ्री मे करना पड़ता है शायद इसीलिए साहब को अस्पताल से बेवफाई और निजी क्लिनिक से बेइंतहा मोहब्बत है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मे मरीजों को मुलभुत सुविधा मिले या ना मिले इससे कोई दरकार नही। (क्रमशः)

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