दुर्ग। छत्तीसगढ़ के सेंट्रल जेलों में इस बार भी बहनों के लिए नो एंट्री का बोर्ड लगा दिया गया। भाई बहन के इस पवित्र पर्व रक्षाबंधन में जेल में बंद भाइयों से मिलने की इच्छा अधूरी रह गई।
दुर्ग सहित छत्तीसगढ़ के सभी जेलों में एक विशेष व्यवस्था के तहत रक्षा बंधन का पर्व मनाया गया।
भाईयों की कलाई पर ऐसे बंधी राखियां
जेल में बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए बड़ी उमीद से बहने दुर्ग जेल पहुंची थी। लेकिन इस वर्ष भी बहनें वंचित रहीं. जेल प्रशासन ने रक्षा बंधन में बहनों के लिए नो एंट्री का बोर्ड लगाया। लेकिन जेलर ने जेल में बंद भाइयों के लिए व्यवथा बनाई जिसके तहत एक लिफाफे में भरकर राखियों को बहने वहां रखे बॉक्स में डाल रही थी। जिसे नाम सहित जेलर ने बन्दी भाईयों तक पहुंचाया। इसके साथ ही बहनों के लिए टेलीफोनिक व वीडियो कॉलिंग की व्यवस्था भी की गई थी।जेल में 135 बंदी महिलाओं की राखियों को जेल प्रबंधन ने डाक के माध्यम से उनके भाइयों के घर के पता पर भिजवा दिया।
तीन साल से बहनों ने भाइयों को नही बांधी राखी
सेंट्रल जेल प्रशासन ने आदेश जारी कर अपनी मंशा साफ कर दिया था कि इस बार जेल में रक्षा बंधन का पर्व नही मनाया जाएगा. प्रबंधन का कहना है कि “कोरोना के बढते मामलों को देखते हुए इस बार भी बाहरी आंगुक्तो या कैदियों के परिजनों के मिलने पर रोक लगा दी गई है। इसलिए सिर्फ टेलिफोनिक व्यवस्था की जाएगी. बहनें आकर बात कर उन्हें देख सकेंगी. उसके लिए समय निर्धारित किया गया है। महामारी के चलते दो साल से बहने अपनी भाइयों को राखी नहीं बांध पा रही हैं। इस तरह यह तीसरा वर्ष हो जाएगा. जबकि इसके लिए जेल प्रशासन पहले से ही टेंट लगाकर व्यवस्था करता था।
दुर्ग के सेंट्रल जेल में 2200 कैदी हैं बंद
दरअसल दुर्ग के केंद्रीय जेल में 2 हजार 40 कैदी व विचाराधीन बंदी हैं। इनसे मिलने के लिए पूर्व में हजारों की संख्या में बहनें आती थीं। इसके लिए जेल प्रबन्धन द्वारा रक्षा बंधन पर खास व्यवस्था की जाती थी। टेंट लगाकर बहनों व भाइयों को राखियाँ बांधती थी। लेकिन दो साल से बहनों को भाइयों से मिलने पम रोक लगा दी गई है. इस वर्ष भी बहनों के हाथ निराशा ही लगेगी।
जेल से महिला बंदीयों ने भेजी राखी
सेंट्रल जेल दुर्ग में पुरुषों के साथ साथ करीब 135 महिला बंदी भी हैं। इस बार रक्षाबंधन पर इन सभी महिला बंदियों की राखियां उनके भाइयों तक पहुंचने के लिए जेल प्रशासन ने व्यवस्था की है। इस बार डाक के माध्यम से उनके भाइयों तक राखी भेज दी गई है। दो दिन पहले ही बहनों की राखियाँ उनके बताए पते पर जेल प्रबन्धन ने पहुंचा दी गई।
जेलर ने कहा इस बार नही मिला आदेश
दुर्ग सेंट्रल जेल के अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्रीय ने बताया कि “हेड क्वार्टर से आदेश आया है कि इस बार भी रक्षाबंधन पर कोई व्यवस्था नहीं होगी। सिर्फ टेलिफोनिक व्यवस्था की गई है। जिसके तहत अपने भाइयों को राखी बांधने पहुंची, बहने भाइयों को सिर्फ देख सकेंगी व टेलीफोन के माध्यम से बात कर सकेंगी। इसके लिए टेलीफोन की व्यवस्था की गई थी। साथ ही सेंट्रल जेल के बॉक्स में बहुत सी बहनों द्वारा राखियां भेजी गई जिसे कैदियों तक पहुंचाया गया। जिसके कारण सेंट्रल जेल के कैदी भाइयों के कलाइयों पर भी राखियां बंध सकी।
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