रायगढ़। धान खरीदी और खाद लोन में भ्रष्टाचार के कारण सहकारी समितियों की व्यवस्था चरमरा चुकी है। एक बार सिरे से सफाई नहीं हुई तो यह गड़बड़ी बढ़ती जाएगी। जिन समितियों को किसानों का सहारा बनना था , वो नुकसान में डूब चुकी हैं। जिले के 110 समितियों में से 68 भारी नुकसान में हैं। सहकारी समितियों का गठन किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हुआ था। प्रारंभ में यही कॉन्सेप्ट था जो बाद में बदल गया। अब समितियों के संचालक मंडल से लेकर प्रबंधक व अन्य कर्मचारी तक समिति का अंधाधुंध दोहन करना चाहते हैं। धान खरीदी और खाद वितरण के अलावा यह समितियां कोई काम नहीं कर पातीं। किसानों को दिए गए लोन की रिकवरी भी समितियां नहीं कर पातीं। 2019 में समितियों में किसानों के कर्ज को माफ किया गया था, उसके बावजूद हालात नहीं सुधरे।

मिली जानकारी के मुताबिक रायगढ़ जिले में 110 सहकारी समितियां थीं, जिनकी संख्या अब 130 हो गई है । वर्तमान में सभी समितियां भंग हो चुकी हैं क्योंकि पांच साल बाद चुनाव नहीं करवाए गए। इन समितियों के आय-व्यय का लेखा जोखा देखें तो बहुत गड़बड़ी दिखेगी । 110 में से 68 नुकसान में चल रही हैं। केवल 42 ऐसी हैं जो कुछ प्लस में हैं। इनका लाभ इतना अधिक भी नहीं है। दरअसल धान खरीदी में गड़बड़ी होने के कारण भी हर साल समितियों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए कमीशन मिलने पर उसकी बंदरबांट हो जाती है।

शॉर्टेज की वसूली करती है सरकार
तीन महीने तक धान समितियों में ही पड़ा रहता है। इस दौरान सूखत और अन्य गड़बड़ियों के कारण धान की कमी हो जाती है। समिति से इसकी वसूली की जाती है। प्रबंधक धान सूखत के नाम पर भरपाई करता है। बाद में कमीशन मिलने पर इस नुकसान की वसूली कर लेता है। इस तरह से समिति को मिलने वाला लाभ हानि में बदल जाता है। उस पर से किसान के लोन की वसूली नहीं करने पर अपेक्स बैंक भी समिति पर कार्रवाई करता है।
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