रायगढ़। होम लोन के लिए आनलाईन सर्च करना एक व्याख्याता को उस वक्त महंगा पड़ा, जब बैंक अधिकारी ही फर्जी निकले। यही नहीं, आरोपियों ने लगभग 4 साल में व्याख्याता से 29 लाख रुपए भी झटक लिया। ठगी का एहसास होने पर फरियादी ने मदद मांगी तो पुलिस ने दिल्ली जाकर आखिरकार गाजियाबाद में 2 शातिरों को धर दबोचा है। सूत्रों के मुताबिक धरमजयगढ़ का व्याख्याता शिवषद मल्लिक विगत 2018 में मकान बनवा रहा था, इसलिए 20 लाख रुपए की जरूरत पड़ने पर उसने लोन के लिए ऑनलार्ईन सर्च किया तो उसके पास फोन आया। कॉल करने वाले शख्स ने खुद को बैंक कर्मचारी बताते हुए झांसे में लिया और निर्माणाधीन मकान को पूरा बनाने के लिए उसे लोन देने का वादा भी किया।
लोन पाने के चक्कर में शिवपद एक्टिव हुआ तो फांदेबाजों ने 2018 से 22 तक यानी तकरीबन 4 बरस अलग अलग नाम बताते हुए बैंक मैनेजर और कर्मचारी से लेकर लोन अफसर बनकर 11 लाख रुपए के बांड एवं पालिसी खरीदवाये । यही नहीं, इस 4 साल में मुल्जिमों ने शिवपद से अलग अलग खाते में 18 लाख कैश भी डिपाजिट करवाया। इस तरह जब लोन पाने की आस में 11 लाख के बांड पालिसी और 18 लाख नगद सहित कुल 29 लाख रुपए देने के बावजूद चार वर्ष तक बेखबर रहे व्याख्याता को बैंक अधिकारियों की गतिविधियों पर शंका हुई तो वह धरमजयगढ़ एसडीओपी दीपक मिश्रा से मिला और आपबीती बताई। पुलिस अधिकारी ने शिवपद से बांडस और पालिसियों को लेकर जांच कराई तो वह फर्जी निकला। साथ ही उन फोन नंबरों को भी खंगाला गया, जिसमें कथित बैंक प्रबंधन काल करता था तो वह भी सही नहीं पाया गया। एसडीओपी दीपक मिश्रा ने इस फर्जीवाड़े की सूचना पुलिस कप्तान अभिषेक मीणा और एएसपी लखन पटले को दी तो कोतरा रोड थाने का प्रभार सम्हाल रहे ट्रेने आईपीएस प्रभात कुमार ने इसे चैलेंज के रूप में लिया और सुलझाने में जुट गए।

प्रभात ने संदिग्धों के फोन नंबर्स का सच जानने के लिए राजधानी रायपुर के सायबर सेल से भी सम्पर्क साधते हुए खूब होमवर्क भी किया। साथ ही विवेचकों की टीम बनाते हुए सारे डिटेल्स भी निकाले। इसके बाद सुनियोजित तरीके से दिल्ली कूच कर गए। बेहतर प्लानिंग और हाईटेक टेक्नोलाजी की बदौलत रायगढ़ से राजधानी गई पुलिस टीम ने अंततः गाजियाबाद में घेराबंदी कर उन 2 ठगराजों को अपने शिकंजे में कस लिया है, जो बैंक अधिकारी बनते हुए व्याख्याता को 29 लाख का चूना लगा चुके हैं। गाजियाबाद से दोनों मुल्जिमों को पुलिस रायगढ़ ला रही है। चार बरस से ठगी के शिकार होने वाले व्याख्याता को यकीन नहीं था कि मुल्जिम पकड़े जाएंगे, मगर रायगढ़ पुलिस ने इसे सुलझाते हुए एक और महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल कर ली है।

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