स्व.विजय बसंत के ग्राम गुड़ेगी मे श्रीमदभागवत कथा मे उमड़ रहे श्रद्धालु…राष्ट्रीय संत पंडित रामगोपाल का के श्रीमुख से द्वितीय दिवस में महाभारत कथा एवं सृष्टि वर्णन में आनंदमय हुए भक्तगण….
रायगढ़। सारंगढ़ अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत गुडे़ली में बसंत परिवार द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का द्वितीय दिवस रहा । आज द्वितीय दिवस में महाराज जी द्वारा महाभारत कथा और सृष्टि रचना का कथा सुनाया गया । आज भी गाँव के बच्चे – बूढ़े और महिलायें सहित सैकड़ों लोग कथा श्रवण के लिए आये हुए थे । इसी कड़ी में वृन्दावन से आये राष्ट्रीय संत पंडित रामगोपाल जी महाराज ने महाभारत कथा का वर्णन करते हुए कहा कि महाभारत प्राचीन भारत का सबसे बड़ा महाकाव्य है। यह कथा सुर्यपुत्र कर्ण अथवा उनके भाईयो पर केन्द्रित है| इस कर्ण कथा कि शुरुवात कर्ण के जन्म से शुरु होती है और स्वर्ग मे उनके अपने भाईयो के मिलन के साथ समाप्त हो जाती है और कर्ण को अदित्य लोक का राजा बनाया जाता है| ये एक धार्मिक ग्रन्थ भी है। इसमें उस समय का इतिहास लगभग 100000 श्लोकों में लिखा हुआ है।

तत्पश्चात महाराज जी सृष्टि रचना का वर्णन करते हुए कहते हैं कि ब्रह्मा जी ने आदि देव भगवान की खोज करने के लिए कमल की नाल के छिद्र में प्रवेश कर जल में अंत तक ढूंढा। परंतु भगवान उन्हें कहीं भी नहीं मिले। ब्रह्मा जी ने अपने अधिष्ठान भगवान को खोजने में सौ वर्ष व्यतीत कर दिये। अंत में ब्रह्मा जी ने समाधि ले ली। इस समाधि द्वारा उन्होंने अपने अधिष्ठान को अपने अंतःकरण में प्रकाशित होते देखा। शेष जी की शैय्या पर पुरुषोत्तम भगवान अकेले लेटे हुए दिखाई दिये। ब्रह्मा जी ने पुरुषोत्तम भगवान से सृष्टि रचना का आदेश प्राप्त किया और कमल के छिद्र से बाहर निकल कर कमल कोष पर विराजमान हो गये। इसके बाद संसार की रचना पर विचार करने लगे। इसके बाद ब्रह्मा जी के पूर्व वाले मुख से ऋग्वेद, दक्षिण वाले मुख से यजुर्वेद, पश्चिम वाले मुख से सामवेद और उत्तर वाले मुख से अथर्ववेद की ऋचाएँ निकलीं। तत्पश्चात ब्रह्मा जी ने आयुर्वेद, धनुर्वेद, गन्धर्ववेद और स्थापत्व आदि उप-वेदों की रचना की। उन्होंने अपने मुख से इतिहास पुराण उत्पन्न किया और फिर योग विद्या, दान, तप, सत्य, धर्म आदि की रचना की। उनके हृदय से ओंकार, अन्य अंगों से वर्ण, स्वर, छन्द आदि तथा क्रीड़ा से सात सुर प्रकट हुये।

इस सबके बावजूद भी ब्रह्मा जी को लगा कि मेरी सृष्टि में वृद्धि नहीं हो रही है तो उन्होंने अपने शरीर को दो भागों में विभक्त कर दिया जिनका नाम ‘का’ और ‘या’ (काया) हुये। उन्हीं दो भागों में से एक से पुरुष तथा दूसरे से स्त्री की उत्पत्ति हुई। पुरुष का नाम मनु और स्त्री का नाम शतरूपा था। मनु और शतरूपा ने मानव संसार की शुरुआत की।

इसी कड़ी में भागवत के मुख्य यजमान तुलसी विजय बसन्त , भागवत यजमान श्रीमती प्रियंका नागेंद्र बसंत , राजेश बसंत , विशाल बसंत , विक्की बसंत , श्रीमती पदमा चमरू भारती (सरपंच) , क्षीरसागर नेताम (उपसरपंच) , कौशिक साहू , विनोद बसंत , मनोज बसंत , विरेन्द्र बसंत , हलधर साहू , बेदराम साहू , घनश्याम साहू , खगेश साहू , गंगाधर सिदार , छोटेलाल सिदार , मनीराम सोनी , हेमेंद्र जायसवाल (युवा पत्रकार) सहित सैकड़ो की संख्या में लोग उपस्थित रहे ।

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