श्रीमद्भागवत का दसम स्कन्ध कृष्ण का प्राण है -जागेश्वर महराज
बिर्रा- जो भाई की संपत्ति हड़प लें ओ दुर्योधन तथा सभी के अंशो को खा जावे ओ कंस होता है ।उक्त उदगार ब्यास पीठ पर विराजित चित्र कूट धाम बृंदावन से पधारे आचार्य संत प्रवर सदगुरुदेव भगवान जागेश्वर देव जी महाराज ,छत्तीसगढ़ की काशी लक्ष्मणेश्वर धाम में मातारानी महामाया प्रांगण माझापारा खरौद मे आयोजित सप्ताह ज्ञान यज्ञ में कही । उन्होंने आगे कहा कि जो अपने यश को भी दूसरे को यश प्रदान कर दे ओ यशोदा होती है और यशोदा के ही आंगन में भगवान खेलते है उसके गोंद में शांति पाते है । यशोदा ही भगवान को बांध सकती है । यशोदा साक्षात मूर्तिमती भक्ति है और भगवान भक्त के वश में होते है । भागवत कथा जीते जी मनुष्य को मुक्ति देती है । भागवत मरना सिखाती है , रामायण जीना सिखाती है , ओर गीता कर्म करना सिखाती है । ब्यासपीठ की सरस वाणी से सभी मंत्र मुग्ध होकर कथारस पान कर रहे है । आज की कथा श्रवण करने मनोज तिवारी , अविनाश तिवारी प्रवीण तिवारी , वेदांश तिवारी यशवी तिवारी इंदु तिवारी शुभ्रा तिवारी , विमला शर्मा , चंद्रमोहन शर्मा , सुबोध शुक्ला ओम प्रकाश पति राम हजारो की संख्या में रसपान कर रहे है । आचार्य के रूप में आलोक महाराज जी विराजमान है कथा प्रतिदिन दोपहर 3:00बजे से कृष्ण कृपा तक रसधारा बह रही है ।
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