जगन्नाथ बैरागी

रायगढ़। भारतीय इतिहास में संत परंपराओं का धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में एक विशिष्ट महत्व रहा है। भारतीय समाज जब-जब पतनोन्मुख हुआ है, तब-तब संतो महात्माओं ने इसे समेटा और संवारा है, तथा सही दिशा में गतिशील किया है। छत्तीसगढ़ में संत गुरू घासीदास ने 1820 ई. में सतनाम पंथ की स्थापना कर समाज सुधार का कार्य प्रारंभ कर नवजागरण का संदेश दिया है। उसने अपने जीवन और संदेशों से अपने युग को एक नयी दिशा दी। भारत वर्ष में प्राचीन काल से ही सतनाम को मानने वाले रहे है। सत को अपने आचार – विचार एवं व्यवहार में लाते हुए सत्मार्ग पर चलते हुए सतकर्म करना और उसे धारण करना ही सतनाम है। यह सत्य, अहिंसा, दया, करूणा, क्षमा, प्रेम, समानता आदि मानवीय गुणों से परिपूर्ण है। आत्मविश्वास एवं सत्कर्माे द्वारा सतनाम के ज्ञान से ही हम अपनी तथा दूसरों की सच्ची सेवा व रक्षा कर सकते है। मानव में मानवता का गुण अर्जित कर सही मानव का निर्माण करना सतनाम का मूल उद्देश्य है। इनके अनुयायी यह मानते है कि ईश्वर का नाम ही सतनाम है और यही एक मात्र सत्य है। छत्तीसगढ़ में सतनाम पंथ के प्रर्वतक गुरू घासीदास जी माने जाते है। वे एक महान संत एवं समाज सुधारक के रूप में अवतरित हुए थे।

उनकी जीवन गाथा पशुता के साथ मानवता, अत्याचार वे साथ प्रेम, अन्याय के साथ न्याय और अंसत्य के साथ सत्य के संघर्ष की कहानी है। इन्ही महान संत की याद मे सारंगढ़ सतनामी समाज प्रतिवर्ष गुरु घासीदास जी के याद मे सत्संग समारोह का आयोजन विभिन्न गांवों मे करते आ रहे हैँ।
चंद्रभानु निराला के अध्यक्षता मे ग्राम हिर्री मे 14 अप्रैल से 17 अप्रैल तक होगा कार्यक्रम –
इस वर्ष इस पावन समारोह के आयोजन का सौभाग्य सारंगढ़ के हिर्री गाँव को प्राप्त हुवा है। जिसमे चारों दिन के कार्यक्रम की अध्यक्षता चंद्रभानु निराला के अध्यक्षता मे सम्पन्न होगा। उक्त कार्यक्रम की तैयारी मे समस्त ग्राम वासी उत्साहित होकर अभी से जुट गये हैँ, क्योंकि इसकी भव्यता ही इसका पहचान है। कार्यकम की सफलता हेतु युवा वर्ग को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

14 अप्रैल से होने वाले पवित्र सत्संग समारोह मे शोभायात्रा, ध्वजारोहन, पूजा, चौका भजन, मंगलआरती, सत्यनाम गुरु घासीदास जी के पंथी नृत्य रूपी मोती से भक्तो को रसपान कराया जाएगा।
प्रत्येक दिन रात्रि मे आरती,पूजा वंदना, पंथी नृत्य, चौका भजन आगंतुक संतो एवं ग्रामवासियों द्वारा किया जाएगा।
बाहर से आगंतुक श्रद्धालुओं और साधु संतो के लिए सरपंच चंद्रभानु निराला द्वारा प्रसादरूपी भोजन की व्यवस्था की जाएगी।
ग्राम पंचायत हिर्री के नवयुवकों समेत समस्त ग्रामवासियों ने समस्त श्रद्धालुओं से सपरिवार सत्संग मे पधारने हेतु निवेदन किया है।
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