रहस्य बन चुका है पद्मनाभस्वामी मंदिर का सातवां दरवाजा….आखिर दुनिया के कोई वैज्ञानिक क्यों नही खोल पाये ? और जिन्होंने कोशिश की क्या हुवा? जाने ….
भारत देश में प्राचीन से प्राचीन मंदिर देखनेको मिलते हैं इनमें से कई मंदिर तो आज भी वैज्ञानिक रिसर्च से काफी दूर हैं और जिन मंदिरों पर वैज्ञानिक ने रिसर्च किया भी है उसने भी सबका सर चकरा कर रख दिया हैं कई लोगों के मन में जरूर इसके खिलाफ शंका होगी, मगर फिर भी उनके पास वैज्ञानिकों की ही तरह कोई जवाब नहीं होगा।
तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा एक ऐसे ही मंदिर के तहखाने का रहस्य बता रहे हैं जिसे वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पा रहे हैं तो आइए जानते हैं।
पद्मनाभस्वामी मंदिर जो कि केरल में स्थित है उस के तहखाने की खबर कुछ साल पहले सर्खियां बन गई मगर इसे खोलने की कोशिश साल 1931 से शुरू हो गई थी। मिश्र हज ने साल 1931 में एक किताब लिखी थी जिसमें बताया गया था कि जब पद्मनाभस्वामी मंदिर के कोबरा वाले तहखाने को खोलने की कोशिश की गई, तब उसमें से कई जहरीले सांप निकल कर बाहर आए और सब को उसे छोड़कर भागना पड़ा उन सब लोगों ने अगले कई सालों तक यह दावा किया कि उन सांपों ने उनका हर जगह पीछा किया, इसके अलावा और भी कई किताबों में इस तहखाने के बारे में जिक्र किया गया हैं।
पद्मनाभस्वामी मंदिर में कई तहखाने हैं मगर इस तहखाने को छोड़कर बाकी सारे तहखाने खोले गए और उसमें सोने की मूर्तिया, गहने कई कीमती चीजें मिली। जिनकी कुल कीमत तीन लाख करोड़ थी। मगर इस तहखाना जिस के दरवाजे पर कोबरा बना हुआ था। उसे नहीं खोला जा सका। क्योंकि जब उस तहखाने का लोहे का दरवाजा खोला गया तो उसके अंदर एक लकड़ी का दरवाजा निकला। जब उस लकड़ी के दरवाजे को तोड़कर खोला गया तो उसके अदंर एक और लोहे का भारी दरवाजा था और उसे खोलने का कोई रातस्ता नहीं था। ऐसा लग रहा था जैसे उस दरवाजे को लगाया ही ऐसे गया हो कि कोई उसे दोबारा खोल ही ना सके।
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