छत्तीसगढ़:युवक ने खुद को मारा चाकू, कुएं में गिरा, फिर…
कोरबा। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के बेन्द्रकोना इलाके में एक 25 वर्षीय युवक ने कथित रूप से खुद को चाकू मारने की घटना को अंजाम दिया। घटना के बाद युवक घर से भागकर पास के एक कुएं में गिर गया, जहां से स्थानीय लोगों ने उसे बाहर निकाला।
गंभीर हालत में उसे कोरबा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। जानकारी के अनुसार, रामकृष्ण नामक युवक ने सुबह अपने गले पर चाकू चला लिया। चोट लगने के बाद वह डर और दर्द के कारण घर से बाहर भागा और पास के कुएं में गिर गया। स्थानीय लोग उसे कुएं से बाहर निकालने में सफल रहे, लेकिन रामकृष्ण भागने की कोशिश करने लगा। लोगों ने उसे पकड़कर तुरंत अस्पताल पहुंचाया।
परिजन और रिश्तेदारों का कहना है कि रामकृष्ण पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान था। उसकी रिश्तेदार सती कुर्रे ने बताया कि रामकृष्ण को भूत-प्रेत का डर सताता था और इसी मानसिक अवसाद के कारण उसने यह कदम उठाया। हास्पिटल में भर्ती युवक ने लेटर हेड पर कुछ लिखने का प्रयास किया है, जिसे पुलिस और चिकित्सक जांच कर रहे हैं। इसके माध्यम से उसकी मानसिक स्थिति और घटना के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। जिला अस्पताल चौकी पुलिस ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल से प्राप्त मेमो के आधार पर युवक के परिजनों का बयान दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि युवक ने यह कदम क्यों उठाया और कहीं इसमें कोई बाहरी कारक तो नहीं था।
इस घटना से इलाके में लोगों में चिंता और भय की स्थिति उत्पन्न हो गई है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने परिजनों से अपील की है कि वे अपने मानसिक रूप से परेशान सदस्यों पर ध्यान दें और समय पर मदद लें। चिकित्सकों का कहना है कि रामकृष्ण की स्थिति गंभीर है और उसकी मानसिक स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ शारीरिक चोटों का इलाज भी किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने आवश्यक मेडिकल टीम और सपोर्ट सिस्टम को सक्रिय रखा है ताकि युवक को पूरी तरह से चिकित्सकीय सहायता मिल सके। स्थानीय पुलिस ने आसपास के लोगों और परिजनों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहने की चेतावनी दी है। पुलिस का कहना है कि इस मामले की पूरी पड़ताल की जाएगी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। यह घटना मानसिक स्वास्थ्य और समाज में तनावपूर्ण परिस्थितियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी संदेश देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर परिवार और समाज का समर्थन मानसिक रूप से परेशान व्यक्तियों के लिए बेहद जरूरी है।
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