कर्म का फल अवश्य भोगना पड़ता है — पूज्य श्रद्धा दीदी..गोविंदवन में संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कर्म, भक्ति और भाव की महत्ता पर दिया आध्यात्मिक संदेश…
बिलाईगढ़। ग्राम गोविंदवन, विकासखंड बिलाईगढ़ में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के दौरान सिमगा (छ.ग.) से पधारी कथावाचिका पूज्य श्रद्धा दीदी जी ने कहा कि “किए हुए कर्म का फल अवश्य भोगना पड़ता है—अवश्यमेव भोगतव्यम् कृतं कर्म शुभाशुभम्।” उन्होंने बताया कि इस संसार में दुख देने वाला कोई दूसरा नहीं होता, बल्कि व्यक्ति अपने ही कर्मों के अनुसार अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करता है।
कथा प्रसंग में श्रद्धा दीदी ने श्रीमद्भागवत महापुराण के अंतर्गत सुकदेव प्राकट्य, भीष्म पारायण, परीक्षित जन्म एवं परीक्षित श्राप की कथाओं का मधुर, सरस और ओजमयी वाणी में भावपूर्ण वर्णन किया। मधुर संकीर्तन के साथ कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान सदैव भावग्राही होते हैं।
भक्ति की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि “जो भगवान का हो जाए वही भागवत है। भगवान के निवास का नाम भागवत है, भगवान के उपदेश का नाम भागवत है, और जो भगवान से संबंध जोड़ ले वही भागवत बन जाता है।”
यह सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा स्वर्गीय रामेश्वर साहू एवं स्वर्गीय बिटावन बाई साहू की स्मृति में अधिवक्ता राम सहाय साहू एवं श्रीमती निर्मला साहू द्वारा आयोजित की गई है। कथा का 27 तारीख को कपिला तर्पण एवं यज्ञ पूर्णाहुति के साथ विश्राम होगा।
कथावाचिका पूज्य श्रद्धा दीदी जी ने अधिकाधिक श्रद्धालुओं से उपस्थित होकर कथा-श्रवण का पुण्य लाभ लेने की अपील की है। कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित हो रही है।
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