छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है. अमरूद तोड़ते समय फिसलकर नाले में गिरी दो मासूम बहनों की मौत हो गई. ग्रामीणों ने तलाश कर उनके शव बाहर निकाले

हादसे ने पूरे गांव को गहरे दुख में डूबा दिया है और नाले की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
रोज की तरह निकलीं थीं बच्चियां
सूरजपुर के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के नवगई गांव में यह घटना उस समय हुई, जब राकेश जायसवाल की चार साल की पूनम और तीन साल की उर्मिला सुबह आंगनबाड़ी जाने के लिए घर से निकली थीं. घर के पास बहने वाला झुरहा नाला और उसके किनारे लगा अमरूद का पेड़ बच्चों के खेलने की रोजमर्रा की जगह था, जहां वे अक्सर फल तोड़ने चली जाती थीं.
अमरूद तोड़ते समय गिरीं बच्चियां
बुधवार को भी दोनों बहनें पेड़ पर लगे अमरूद तोड़ने गई थीं. बारिश के बाद नाले का पानी गहरा हो गया था और बहाव तेज था. इसी दौरान बच्चियां संतुलन बिगड़ने से किनारे से फिसल गईं और सीधे नाले में जा गिरीं. उस समय आसपास कोई नहीं था, इसलिए उनकी आवाज किसी तक नहीं पहुंच सकी.
कपड़े और चप्पल देखकर हुआ शक
कुछ देर बाद जब ग्रामीण नाले के पास से गुजरे, तो उन्हें बच्चियों के कपड़े और चप्पल किनारे पड़े दिखाई दिए. उन्हें खतरे का अंदेशा हुआ और तत्काल नाले में खोज शुरू की गई. थोड़ी देर की तलाश के बाद दोनों बच्चियों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं.
घटना की खबर मिलते ही गांव में सदमा फैल गया. बच्चियों के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. ग्रामीण भी गम में डूबे हैं और हर घर में इस दुखद हादसे की चर्चा हो रही है. लोगों का कहना है कि ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए जिम्मेदारों को जागना होगा.
नाले पर सुरक्षा नहीं, ग्रामीणों ने जताई नाराज़गी
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि झुरहा नाले के पास न सुरक्षा दीवार है, न चेतावनी बोर्ड. बरसात के मौसम में नाले का पानी हमेशा गहरा हो जाता है, लेकिन प्रशासन ने कभी एक भी सुरक्षा कदम नहीं उठाया. ग्रामीणों का कहना है कि यदि नाले पर बैरिकेडिंग या रेलिंग होती, तो शायद दो मासूमों की जान बच सकती थी.
सुरक्षा व्यवस्था की मांग
गांव के लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से तुरंत सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि नाले के किनारे मजबूत रेलिंग, चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग लगना बेहद जरूरी है. इस घटना ने सभी को चेतावनी दे दी है कि प्राकृतिक जलधाराओं के पास लापरवाही किसी भी समय बड़ी त्रासदी में बदल सकती है.
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