रायगढ़: सुनियोजित तरीके से पीडीएस चावल को दूसरी जगह खाली करवाकर बेचने के मामले में परिवहन ठेकेदार भारी पड़ गया। नागरिक आपूर्ति निगम की गोद में बैठकर इस तरह के घोटाले को अंजाम देने वाले ट्रांसपोर्टर और राइस मिलर अब भी कार्रवाई की जद में नहीं आए हैं। बरपाली ग्राम पंचायत में 17 लाख के पीडीएस चावल की कालाबाजारी मामले की फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई। करीब 400 क्विंटल चावल कहां खाली हुआ और वहां से कहां गया, इस सवाल का जवाब कोई नहीं खोज सका है। पुलिस ने सरपंच और ड्राइवर के अलावा दो और लोगों से भी पूछताछ की थी।

पुलिस ने मुख्य आरोपी सरपंच सुरेश पटेल के साथ मोहन पटेल, ट्रांसपोर्टर प्रतिनिधि प्रमोद महंत और ड्राइवर को उठाया था। सबके बयानों में मामला खुल गया। चावल का ट्रक बरपाली पहुंचा ही नहीं। चावल बेचने वाले गिरोह ने इसे किसी राइस मिल में पहुंचा दिया। इस मामले में अब तक केवल दो ही आरोपी पकड़े गए हैं। नागरिक आपूर्ति निगम में बजरंग अग्रवाल निवासी खरसिया को टेंडर मिला था। इस बार भी इसी ठेकेदार को टेंडर दिया गया है। बरपाली मामले में कार्रवाई को जानबूझकर रोक दिया गया है। नान की ओर से ठेकेदार से सवाल तक नहीं पूछा गया। सरपंच ने चावल दूसरी जगह खाली कराया, लेकिन वह चावल कहां खपाया गया?

क्या वापस नान के गोदाम में पहुंचा चावल?
बरपाली राशन दुकान से 392.78 क्विंटल चावल, 0.54 क्विं. शक्कर और 0.91 क्विं. नमक गायब मिला था। इसकी कीमत 17,38,899 रुपए है। मोहन पटेल और प्रमोद महंत ने पुलिस को अपने बयानों से भ्र्रमित कर दिया है। 392 क्विंटल चावल कहीं खाली हुआ है तो किसी ने तो इसका उपयोग किया होगा। राइस मिलर को बचाने के लिए नागरिक आपूर्ति निगम, खाद्य विभाग और ने जांच का दायरा सीमित कर दिया है।
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