सारंगढ़: प्रबंधक और नोडल मिलकर अन्नदताओं की जेब मे डाल रहे डाका…? किसान हितैषी सरकार के दावों की सारंगढ़ में घुट रहा है दम…! “किसान मजबूर” किसके दम पर नोडल- प्रबंधक कमाई करने मशगूल….?

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सारंगढ़: छत्तीसगढ़ साहित सारंगढ़ मे सत्ता परिवर्तन के बाद जिले के अन्नदाताओं को नई सरकार से उम्मीदें बढ़ गई है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में अपने संकल्प पत्र में किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये में खरीदने का वादा किया है। जिस कारण सारंगढ़ के किसान भाई अपने अनाज के दाने – दानों की कीमत पाने उत्सुक नज़र आ रहे हैँ, लेकिन उनकी खुशी उस समय हवा हो जाती है जब प्रबंधक और नोडल के निर्देश पर उनसे 40 की जगह 41 से 42 किलो धान लेकर प्रति बोरी मे 40 से 60 ₹ नुकसान उठाना पड़ रहा है। तौलाई से पहले नमी,सफाई इत्यादि नाना प्रकार से परेशान गई रहे किसान किसी तरह तौलाई करा पर्ची प्राप्त करने मजबूर हैँ, ऐसे में प्रबंधक की मनमानी चरम पर है।

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धान उपार्जन केंद्र कटेली में किसानों से लूट ?

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किसानों ने मीडिया को जानकारी दी कि धान उपार्जन केंद्र कटेली में 40 किलो से ज्यादा धान लिया जा रहा है, कुछ कहने पर धान तौलाई नही करने की धमकी दी जा रही है। तब मीडिया की टीम ने शिकायत स्थल पर जाकर देखा तो पाया गया की सही में निर्धारित वजन से अधिक मात्रा में तौलाई हो रही थी। साक्ष्य लेकर जब नोडल से शिकायत करने किसानों को कहा गया तो किसानों ने एक स्वर में कहा कि कौन है नोडल हमे ज्ञात नही, ना ही उनका कभी दर्शन होता है, हम सिर्फ प्रबंधक को ही जानते हैँ उन्ही के आदमी धान को पास फैल करते हैँ।

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नोडल अधिकारी का कर्तव्य –

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भले ही धान उपार्जन केंद्र में प्रबंधक , फड़ प्रभारी, बारदाना प्रभारी, कम्प्यूटर ऑपरेटर होते हैँ लेकिन उन सबसे अधिक दाईत्व और पॉवर सरकार ने नोडल अधिकारी को दे रखा है। अक्सर प्रबंधक कुछ व्यापारी और बड़े किसानों से साँठ गाँठ कर दूसरे के धान को दूसरे टोकन या पट्टे में बेचकर सरकार को करोड़ों का चुना लगाते हैँ, जिस पर प्रति क्यूंटल के दर से प्रबंधक को फिक्स चढ़ावा जाता है! इन सबके रोकथाम हेतु सरकार ने प्रत्येक धान उपार्जन केंद्र में नोडल की नियुक्ति की है, ताकि वास्तविक किसानों को तकलीफ ना हो और कोचियों और व्यापारियों पर अंकुश लग सके। नोडल का ही दाईत्व होता है की सभी किसानों का सत्यापन करे, तत्पश्चात धान में नमी चेक करना, धान की क्वालिटी चेक करके बोरी वितरण कराना, धान तौलाई से लेकर छल्ली कराकर वास्तविक रिपोर्ट प्रतिदिन मुख्यालय में जमा करना होता है। लेकिन कुछ नोडल विभागीय काम के बहाने प्रबंधक से कमीशन पाने के लालच में ना ही मुख्यालय निर्धारित समय तक रुकते हैँ और ना ही किसानों की समस्या को सुनते हैँ।जिसका खामियाजा सारंगढ़ के अन्नदाता उठाते हैँ, क्योंकि सरकार के प्रतिनिधि अर्थात नोडल के उपस्थित ना होने के कारण वो अपना दुखड़ा सुनाएँ भी तो किसे?

कटेली प्रबंधक कि मनमानी से किसान परेशान !

कटेली प्रबंधक फुलसिंह रात्रे के उपर व्यापारियों से सांठ-गाँठ, अधिक मात्रा में धान तौलाई, किसानों से काम कराने साहित दर्जनों आरोप लगये आ रहे हैँ लेकिन उच्च अधिकारियों तक पहुंच की धौन्स दिखाकर किसानों को चुप करा दिया जाता है। बेबस लाचार किसान इसे अपनी नियति समझ चुप रहने में ही भलाई समझते हैँ। लोगों

मीडिया का नही उठाते फोन –

जब भी किसानों की शिकायत पर प्रबंधक का पक्ष लेने हेतु फोन लगाया जाता है तो नेता प्रबंधक फोन उठाना ही मुनासिब नही समझते। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की उक्त प्रबंधक फुलसिंह रात्रे किसानों से कैसा बर्याव करते होंगे! उपर से साहब द्वारा जाओ जो करना है कर लो कहकर भी रुतबा दिखाया जाता है।

नोडल बालक दास डहरिया की वजह से किसान हो रहे परेशान?

सारंगढ़ कृषि विभाग में पदस्त ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी बालक दास डहरिया को शासन ने धान उपार्जन केंद्र कटेली में भ्रस्टाचार निवारण एवं निगरानी हेतु नोडल अधिकारी बनाकर भेजा है। लेकिन अपने दाईत्यों के प्रति पुरी तरह लापरवाह श्री डहरिया ना ही धान आवक समय रहते हैँ, ना कभी नमी एवं क्वालिटी चेक करके पास या फैल करते हैँ, ना ही कभी निर्धारित समय तक रहकर धान तौलाई, सिलाई और छल्ला करवाते हैँ। बस कभी कभार घूमने आने के नाम से आकर निरीक्षण पंजी में लिखकर विभागीय काम का बहाना बनाकर चलते बनते हैँ, ऐसा हम नही बल्कि किसानों का कहना है।

मीडिया की शिकायत पर भी बहाने बनाता है नोडल –

जब किसानों ने अधिक तौलाई की शिकायत मीडिया से की तब उपार्जन केंद्र में जाकर किसानों के कहने पर तौल की गई बोरी को दोबारा तौलाया गया तो लगभग प्रत्येक बोरी में निर्धारित मात्रा से 1 से 2 किलो तक अधिक पाया गया। जिसकी जानकारी बालक दास डहरिया को दी गई तो पहले आधे घंटे में आने की बात साहब द्वारा की गई, लेकिन घंटो बिट जाने के पश्चात भी नही आये। दुबारा फोन करने पर किसान लोग आये हैँ अभी नही जा पाऊंगा कहकर फोन काट दिया गया। तब हताश निराश किसान अपनी नियति समझ कड़वे घुट पिने मजबूर हुवे।

नोडल और प्रबंधक पर जब होगी कड़ी कार्रवाई, तब मिलेगा किसानों को न्याय –

जिस तरह एक पिता बच्चों को बड़ा करता है ठीक उसी भाँती एक किसान इस अपने अनाज की देखभाल करता है। ऐसे में कुछ लोभी प्रबंधक और नोडल प्रत्येक बोरी में 1 से 2 किलो धान अतिरिक्त लें तो पुरी खरीदी के दौरान लाखों रुपये की ब्लैक कमाई कर सकते है, जिसमे जानकर अनजान बनने की फिक्स कमीशन नोडल की होती है इसलिए कुछ नोडल भी जानकर अनजान बनते हैँ। और जब तक ऐसे प्रबंधक और नोडल पर कठोर कार्रवाई नही होती तब तक किसानों से न्याय संभव नही है।

क्या है असली खेला –

किसानों को पहले नमी, सफाई या अन्य कारण बताकर सुखती के नाम से 41 से 42 किलो तौलने हेतु मना लिया जाता है। फिर शाम तक आवक लेकर लेबर कम होने की दुहाई देकर तौलाई पश्चात सिलाई नही की जाती। जब सभी किसान चले जाते हैँ तब प्रत्येक बोरी से एक्स्ट्रा 1 से 2 किलो तौले धान को निकाल कर अलग बोरी में भर कर जिन किसानों के खाते में कोटा बचा होता है उनके में आपसी संबंध का हवाला देकर बेच दिया जाता है, अर्थात समिति वाले स्वयं बिना धान बोये, धान खरीदे, किसानों के धान में ही खुद की काली कमाई आसानी से कर लेते हैँ जिसकी भनक भी नही लगती!

खाद्य अधिकारी पकड़ चुके हैँ अवैध धान, फिर भी नही सुधरे प्रबंधक और नोडल –

विगत दिनों खाद्य अधिकारी चित्रकांत ध्रुव और मंडी उप निरीक्षक श्री दिलीप बर्मन की संयुक्त टीम ने जिले के धान उपार्जन केन्द्र कटेली के बाहर वाहन क्रमांक मेटाडोर CG 13 uj 2410 में रखे 140 बोरा धान को सारंगढ़ के नजदीक ग्राम रापागुला निवासी श्री शंकर लाल साहू के टोकन में खपाने का प्रयास करते हुए मौके पर पकड़ा गया। इनके विरुद्ध मंडी अधिनियम के तहत कार्यवाही किया गया। किन्तु उसके बावजूद नोडल बालक दास डहरिया और प्रबंधक रात्रे की मनमानी जोरों पर है।

कटेली में निष्पक्ष जांच होने पर उजागर हो सकते हैँ बड़ा मामला –

किसानों की माने तो कटेली में अगर निष्पक्ष जांच की जाये तो ना सिर्फ किसानों से छलावा बल्कि फर्जी रकबा साहित और कई मामले उजागर हो सकते हैँ! फिलहाल अभी किसानों की वर्तमान समस्या पर प्रशासन को ध्यान देकर नोडल और प्रबंधक पर कठोरतम कार्रवाई की दरकार है।

क्य कहते हैँ नोडल –

मै तो निरीक्षण पंजी मे लिख देता हूं की 40 किलो धान तौलना है, मै बाहर हूं वहाँ आ रहा हूं। (फिर किसान आये हैँ काम है कहकर घंटो इंतज़ार कराने के बावजूद नोडल धान खरीदी केंद्र मे नही आये)

प्रबंधक ने फोन उठाना मुनाशीब नही समझा –

जब हमालों ने कहा कि हम मुखिया के आदेश पर अधिक धान खरीद रहे हैँ, तब प्रबंधक से उनकी राय जाननी चाही, तो उन्होंने बार बार घंटी जाने के बाद भी फोन नही उठाया।

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