घर से लेकर मार्केट तक सिर्फ करवा चौथ की धूम देखने को मिल रही है। हर साल सुहागिन महिलाएं इस दिन को बहुत ही हर्षोल्लास और धूम-धाम से मनाती हैं।
इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में खुशहाली के लिए सुबह से भूखी प्यासी रहती हैं और रात में चंद्रमा की पूजा करने के बाद ही पति के हाथों इस व्रत को खोलती हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि इस व्रत की शुरुआत कब और कहां से हुई। आज हम इस आर्टिकल में इसी के बारे में जानेंगे।

कब और किस मुहूर्त में करें करवा चौथ की पूजा?
पहली बार किसने रखा था करवा चौथ का व्रत?
कब और किस मुहूर्त में करें करवा चौथ की पूजा?

इस साल करवा चौथ का व्रत 1 नवंबर 2023 को रखा जाएगा।
करवा चौथ व्रत समय- सुबह 6 बजकर 36 मिनट से रात 8 बजकर 26 मिनट की
करवा चौथ पूजा मुहूर्त- शाम 5 बजकर 44 मिनट से रात 7 बजकर 2 मिनट की
चांद निकलने का समय- रात 8 बजकर 26 मिनट पर
पहली बार किसने रखा था करवा चौथ का व्रत?
पौराणिक कथाओं के मुताबिक करवा चौथ की शुरुआत त्रेता युग से हुई है। इस व्रत को पहली बार माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से मां पार्वती को अपार सौभाग्य का आशीर्वाद मिला था। कहते हैं कि तभी से सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए करवा चौथ का व्रत रख रही हैं। हालांकि इसके अलावा करवा चौथ व्रत को लेकर और भी कई कहानियां प्रचलित हैं। जिनमें से एक कहानी भगवान शिव और माता पार्वती की भी है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। हम इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करते।
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