चीनी, दाल और प्याज की कीमतें उच्च स्तर पर,80 फीसदी तक की बढ़त, निकट अवधि में राहत की उम्मीद नहीं….
त्यौहारी मौसम में रसोई का बजट बिगड़ता नजर आ रहा है। मुख्य रूप से रोजाना उपयोग में आने वाली वस्तुओं चीनी, दाल और प्याज की कीमतों में 80 फीसदी तक की बढ़त आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम बढ़कर 12 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। वहीं, खुदरा बाजार में प्याज भी 80 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव तक बिक रहा है। अरहर दाल की कीमत भी 152 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है।
दरअसल, आपूर्ति में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से वैश्विक बाजारों में चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसका असर घरेलू बाजार में भी चीनी की कीमतों पर दिख रहा है। उपोभक्ता मामलों के मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, घरेलू बाजार में चीनी 45 रुपये प्रति किलो बिक रही है। हालांकि, कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है।
अरहर दाल : एक साल में 40 फीसदी बढ़कर 152 रुपये किलो
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अरहर दाल एक साल में 40 फीसदी तक महंगी हो चुकी है। 31 अक्तूबर, 2022 को अरहर दाल की कीमत 110.56 रुपये किलो थी। 31 अक्तूबर, 2023 यानी सोमवार को यह बढ़कर 152 रुपये के पार पहुंच गई। इसी तरह, उड़द दाल का भाव 107 रुपये से बढ़कर 120 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर पहुंच गया। मूंग दाल 101 रुपये से बढ़कर 115 रुपये किलो के पार पहुंच गया। चना दाल की कीमत भी 71 रुपये किलो से बढ़कर 83 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई है।
प्याज : 90 फीसदी तक बढ़ गए दाम, अब 80 रुपये प्रति किलो
मंत्रालय के अनुसार, प्याज के दाम पिछले साल इसी समय 28 रुपये किलो थे। अब यह 50 रुपये किलो से ज्यादा हो गया है। हालांकि, खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें 80 रुपये के करीब पहुंच गई हैं। थोक बाजारों में यह 60-70 रुपये किलो बिक रही हैं। हालांकि, सरकार रियायती दाम पर ज्यादा प्याज बेच रही है, बावजूद इसके दाम में कोई असर नहीं दिखा है।
निकट अवधि में राहत की उम्मीद नहीं…
विश्लेषकों का कहना है कि ये तीनों उत्पाद रसोई के ऐसे सामान हैं, जिनकी हर दिन मांग होती है। ऐसे में निकट समय में इनकी कीमतों में कमी आने के आसार बहुत कम हैँ।
जारी रह सकता है निर्यात प्रतिबंध
अक्तूबर, 2022 से सितंबर, 2023 के बीच चीनी उत्पादन 3.36 करोड़ टन रहा है। इस दौरान निर्यात में 74 लाख टन की वृद्धि रही। इससे दाम बढ़े हैं। उम्मीद है कि सरकार घरेलू मांग को पूरा करने और चीनी की कीमतों को थामने के लिए निर्यात प्रतिबंध जारी रख सकती है। -हरजीत सिंह अरोरा, एमडी, मास्टरट्रस्ट
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