रायगढ़: पढ़ाई लिखाई मे नही बदहाल स्कूल भवनो मे जिला अव्वल…! 145 भवन हो चुके हैँ खंडहर, 30 स्कूलों के बच्चे बाहर पढ़ने मजबूर…. पूरे प्रदेश मे सबसे ज्यादा सबसे ज्यादा 1800 स्कूलों की दरकार रायगढ़ को…

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रायगढ़: 10 सालों में जिले में शिक्षा के क्षेत्र में विकास हुआ है, लेकिन अभी लंबी दूरी तय करनी है। रायगढ़ जिला पढ़ाई लिखाई की बजाय बदहाल भवन में अव्वल है। पहले रायगढ़ जिले के कालेज बिलासपुर विवि से संबद्ध थे। वर्ष 2015 में मेडिकल कालेज स्थापना के बाद यूनिवर्सिटी स्थापना की मांग शुरू हुई। नवंबर 2020 में शहीद नंदकुमार पटेल यूनिवर्सिटी शुरू कर दी गई, लेकिन विश्वविद्यालय भवन निर्माण के लिए 200 एकड़ जमीन नहीं मिल रही है।

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इतना ही नहीं 70 स्वीकृत पदों पर भर्ती तक नहीं हुई है। आत्मानंद स्कूलों की स्थापना से सरकारी स्कूली शिक्षा बेहतर हुई है, लेकिन बड़ी संख्या में पद खाली होने, भवनों के खस्ताहाल होने के कारण बाकी स्कूलों की दशा खराब है। हालांकि हाल में ही राज्य सरकार ने जिले के खस्ताहाल स्कूलों के लिए 130 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है।

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मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना में सरकार ने प्रदेश में खस्ताहाल स्कूलों के लिए 500 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान रखा। बताया गया है कि इसमें सबसे ज्यादा 1800 स्कूलों (खस्ताहाल और अतिरिक्त निर्माण मिलाकर) का प्रस्ताव रायगढ़ से था। जिला शिक्षा विभाग के मुताबिक जिले में खंडहर हो चुके स्कूल भवन 145 हैं।

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इनमें 30 से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बच्चों को बाहर बैठाकर बढ़ाया जाता है। सरकार से बजट मिलने में देरी से पंचायत से – मरम्मत की गई, जिसमें राशि की बंदरबांट की शिकायतें आईं। सरकार ने जिले के खस्ताहाल स्कूलों की मरम्मत के लिए लगभग 130 करोड़ की राशि स्वीकृत की है।

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उधार के भवन में सिर्फ प्रशासनिक काम –

भास्कर की टीम विश्वविद्यालय में कामकाज देखने गढ़उमरिया स्थित किरोड़ीमल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी गए। विश्वविद्यालय केआईटी के एक हिस्से में चलता है। यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. ललित प्रकाश पटैरिया ने बताया यहां कुलसचिव, उप कुलसचिव, सहायक कुलसचिव के एक एक पद हैं। दो उप कुलसचिव, पांच कर्मचारी और अधिकारी विवि में अटैच हैं। बाकी 34 कर्मचारियों को दैनिक वेतन भोगी हैं।

70 पदों को स्वीकृति दी गई है, लेकिन वित्त और उच्च शिक्षा विभाग से मंजूरी नहीं मिली है। अपना भवन नहीं होने और शैक्षणिक कार्यों के लिए 98 पदों पर भर्ती नहीं होने से विश्वविद्यालय में यूटीडी (यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट) शुरू नहीं हो सका है। अभी विवि एक प्रशासनिक इकाई की तरह की काम कर रहा है। 10 सालों में जिले में पांच नए सरकारी कालेज पुसौर, बरमकेला, सरिया, चपले और कुसमुरा में खुले। जिले में 15 सरकारी और 30 प्राइवेट कालेज हैं।

फैक्ट फाइल स्कूली शिक्षा में यह है हाल

* 1430 प्राथमिक, 632 माध्यमिक और हाईस्कूल और 122 हायर सेकंडरी स्कूल हैं।

* शिक्षक और लिपिक मिलाकर 11 हजार 758 पद और 2413 पद खाली हैं।

* 216 लेक्चरर, 297 मिडिल स्कूल प्रिंसिपल, 728 शिक्षक्र, 798 सहायक शिक्षकों के पद खाली हैं।

* प्राइमरी में 1 लाख 81 हजार 990 बच्चे हैं। 5 साल में संख्या 9700 विद्यार्थी बढ़े हैं।

* मिडिल स्कूल में 1 लाख 9 हजार 386 बच्चे हैं, 5 साल मैं 7200 बढ़े।

* हाईस्कूल में 32 हजार 673 छात्र, 5 साल में 11 हजार बच्चे बढ़े।

« हायर सेकंडरी में 28 हजार 533 छात्र हैं, 12250 बच्चे बढ़े हैं।

* विभाग के रिकार्ड के मुताबिक 2021 22 में 256 और 2022 23 में 289 विद्यार्थी ड्राप आउट हुए हैं। समग्र शिक्षा खोज अभियान के तहत ड्रॉप आउट बच्चे ढूंढ़े जाते हैं। स्वयंसेवी शिक्षक की सहायता से उन्हें बेसिक स्कूल एजुकेशन दिया जाता है।

हाई स्कूल भवन नहीं, प्राइमरी व मिडिल स्कूल में लग रही कक्षाएं –

धरमजयगढ़ और लैलूंगा के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों को तो छोड़िए, जिला मुख्यालय से 7 किमी दूर गढ़उमरिया में हाई स्कूल के बच्चों के लिए भवन नहीं है। इसकी पड़ताल करने भास्कर टीम स्कूल पहुंची। गांव में सरकारी रिकार्ड पर हाईस्कूल हैं, लेकिन भवन नहीं है। इस वजह से पढ़ने वालों की संख्या कम है। 98 बच्चे हैं। इनकी कक्षा प्राथमिक और मिडिल स्कूल के लिए बने भवन में लगती है। शिक्षक एमके बंजारे ने बताया प्राथमिक 130 और मिडिल स्कूल में 130 बच्चे हैं। भवन में सुबह प्राइमरी स्कूल की कक्षा लगती है, दोपहर को मिडिल और हाई स्कूल की पढ़ाई होती है। अप्रैल में गर्मी के कारण बदले टाइम टेबल से मुश्किल बढ़ गई है। बंजारे बताते हैं कि कुछ वर्षों पहले हाई स्कूल के लिए भवन स्वीकृत हुआ था, राशि लैप्स हो गई। अब फिर भवन निर्माण को स्वीकृति मिली है।

आत्मानंद स्कूल ने बदल दी व्यवस्था –

तीन साल पहले शहर के नटवर स्कूल में सरकारी इंग्लिश मीडियम आत्मानंद स्कूल शुरू किए गए। अब जिले में 10 सेजस ( स्वामी आत्मानंद स्कूल) हैं। इनमें 5500 विद्यार्थी हैं। अगले सत्र से एक सेजस के साथ 30 आत्मानंद हिंदी मीडियम स्कूल खुलेंगे। निजी स्कूलों की तर्ज पर यहां न सिर्फ सुविधाएं हैं, बल्कि शिक्षा गुणवत्ता भी कम नहीं है। यहां दाखिले के लिए केंद्रीय विद्यालय जैसी जद्दोजहद होती है। सेजस के शुरू होने के साथ ही सरकारी स्कूलों में शिक्षा बेहतर हुई है।

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