सारंगढ़ के एक छोटे से गाँव अमलडीहा में रहने वाली शकुन्तला साहू को कुछ वर्ष पूर्व कोई नही जानता था,शकुन्तला भी एक आम महिला की तरह हाउस वाइफ थी, लेकिन शकुन्तला सिर्फ हाउस वाईफ बन कर अपना जीवन व्यतीत नही करना चाहती थी,उसके अंदर शुरू से ही कुछ करने का हौसला देखा जाता था, और बिहान योजना ने सकुन्तला को उड़ान भरने के लिए पंख दे दिया, दरसल शकुन्तला 5 जनवरी 2018 में नवबंधू स्व सहायता समूह से जुड़ कर काम करने लगी, और 29 मार्च 2019 बिहान योजना से जुड़ गई, जिसके छः माह बाद शकुन्तला के मेहेनत और कार्य करने के लगन को देखते हुए उसे बी.सी सखी के रूप में 9जनवरी 2020 को चयनित किया गया, और तब से शकुन्तला एक सक्रिय बी.सी सखी के रूप में काम कर रही है,आपको बता दें अभी तक शकुन्तला साहू ने 6करोड़ 39हजार 900रूपये का ट्रांजेक्शन करके ये साबित कर दिया किया वह अपने काम को लेकर कितनी सक्रिय है, शकुन्तला को कुल पांच गाँव ट्रांजेक्शन के लिए दिए गए है, जंहा वो गाँव वालो को आर्थिक सुविधा उपलब्ध करा रही है, गाँव वालो ने बताया की गाँव से बैंक बहुत दूर पड़ता था, और आने जाने में भी परेशानी होती थी, साथी ही जो व्यक्ति चलने फिरने में असमर्थ है, या फिर किसी को वृद्धा पेंशन निकालना होता है तो सकुन्तला को सिर्फ एक फोन करने की आवश्यकता होती है, जिसके बाद शकुन्तला उस जरुरत मंद लोगो के घर पहुँच कर उनका ट्रांजेक्शन कर उनको बैंक जैसी सुविधा उपलब्ध कराती हैं, गाँव के लोगो का कहना हैं की शकुन्तला ने हमारी आधी परेशानी दूर कर दी हैं, नही तो हमें पैसे निकालने के लिए आठ से दस किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था, जिसके कारण उन्हें अपनी रोजी मजदूरी से भी वंचित होना पड़ता था, लेकिन जब से शकुन्तला ने बी.सी सखी काम शुरू किया है, शकुन्तला के कार्य क्षेत्र में आने वाले पांचो गाँव के लोगो की बैंक ट्रांजेक्शन की परेशानी दूर हो गई है

क्या कहती है बी.सी सखी शकुन्तला साहू

वही शकुन्तला का कहना हैं की वो शुरू से कुछ करना चाहती थी, और बिहान योजना ने उसके सपनो को पंख दे दिया, आज बिहान योजना से ही जुड़ कर वो अपनी पहचान स्थापित कर पाई हैं, शकुन्तला ने जब से बी.सी सखी के रूप में काम करना शुरू किया है , तब से आस पास के गाँव वाले भी उसे उसके नाम से पहचानने लगे हैं,सकुन्तला को बी.सी सखी के रूप में काम करते हुए आज लगभग डेढ़ साल हो गए हैं और इन डेढ़ सालो में सकुन्तला ने 6करोड़ 39हजार 900रूपये का ट्रांजेक्शन किया हैं, और कमिशन के पैसो से खुद के लिए स्कूटी भी खरीद पाई हैं, स्कूटी खरीदने के बाद से शकुन्तला को काम करने में और भी आसानी हो रही हैं, शकुन्तला ने बताया की उसे बहुत ख़ुशी होती हैं जब वो किसी के काम आ पाती हैं,जो लोग चलने फिरने में असमर्थ है या फिर वृद्ध लोगो को जब उनके घर में ही ट्रांजेक्शन की सुविधा उपलब्ध होती हैं तो उनके चेहरे की ख़ुशी देखते बनती हैं, और यही मेरी भी ख़ुशी होती हैं, लोगो को घर घर जाकर पेंशन की राशि मुहैय्या कराना कैम्प लगाकर किसानो को किसान सम्मान निधि,तेंदू पत्ता का भत्ता, राजीव गांधी न्याय योजना की राशि उपलब्ध कराती हैं,वही शकुन्तला ने बिहान योजना की तारीफ करते हुए कहा की अगर बिहान योजना नही होती तो सायद ही मै ये काम कर पाती आज मै जो भी हूँ वो सब बिहान योजना की ही दें हैं, मै सदा बिहान योजना की आभारी रहूंगी!
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