रायगढ़। रायगढ़ जिले के साथ.साथ प्रदेश के कई जिलों में एक लंबे अर्से से जंगली हाथियों का आतंक जारी है। जंगलों में रहने वाले ये गजराज जंगलों से निकलकर रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर किसानों के घरों व फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस दोरान अगर इन जंगली हाथियों का किसी भी व्यक्ति से सामना हो जाए तो उसकी मौत्त निश्चित हो जाती है। दरअसल क्षेत्र के कटते ओर घटते जंगलों क कारण एक तरफ जहां रिहायशी क्षेत्र बढ़ रहे हैं तो दूसरी ओर इन गजराजों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है। जिसक कारण इनके आमने.सामने होन॑ के मामले पिछले कुछ वर्षो में लगातार बढ़े हें।

जंगली हाथी प्रभावित इलाकों में कई बार ऐसे भी नजारे सामने आते हैं जब गजराज सड़कों पर आ जाते हैं ओर घंटो तक उस मार्ग में बाहनों क पहिये थम जाते हैं। ऐसा ही एक नजारा शुक्रवार की सुबह रायगढ़ जिला मुख्यालय से महज 24 किलोमीटर दूर तमनार बन परिक्षेत्र क अंतर्गत आने वाले सामारूमा में देखने को मिला। जब गजराजों का एक दल जंगलों से निकलकर सड़क किनारे आ पहुंचाए इस दोरान इस मार्ग क दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई। वहां उपस्थित कई लोगों ने जंगली हाथियों के वीडियो अपने मोबाईल में केद भी किये। लोगों ने बताया कि जंगली हाथियों क इस दल में कई शावक भी थे। इस क्षेत्र में काफी लंबे अर्से बाद जंगली हाथियों क दल को आज देखा गया है। लिहाजा इस क्षेत्र क लोगों मे दहशत का माहोल निर्मित हो गया है।

यूं तो रायगढ़ जिले के वनांचल धरमजयगढ़ए छालए घरघाड़ाए तमनार के अलावा रायगढ़ वन मंडल क बंगुरसिया के जंगलां में सदेव जंगली हाथियों की मौजूदगी रहती है। इसमं से धरमजयगढ़ ओर छल वन परिक्षत्रों में जंगली हाथियों का आतंक सबसे अधिक देखा जाता है। एक अन्य जानकारी क मुताबिक धरमजयगढ़ वन परिक्षत्र क अंतर्गत आने वाले कई गांव एस भी हैं जहां शाम ढलत ही गांव की गलियां सुनी हो जाती है ओर कई गांव ऐसे भी हैं जहां के युवा से लेकर बुजुर्ग बारी.बारी स रतजगा कर अपने फसलोंए अपन घरां व अपन जान की रक्षा करते आ रहे हें।
रायगढ़ जिले के साथ.साथ पूरे प्रदेश में जंगली हाथियां की बढ़ती संख्या हाथी प्रभावित क्षत्र क लोगों क लिय एक चिंता का विषय बनत जा रही है। किसी भी हाथी प्रभावित क्षत्र में जंगली हाथियों की आमद क बाद वन विभाग गांव में मुनादी कराकर क्षेत्र के लोगां को जंगल नही जाने की बात कहता हे। साथ ही हाथी क द्वारा मचाए गए उत्पात के बदल किसानों को मुआवजा भी दिया जाता है। परंतु जिस हिसाब से किसानां को मुआवजा मिलता है वह नुकसान के एवज में काफी नही रहता। जिसक कारण आम तौर पर किसानां में आक्राश दखा जा रहा है।
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